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महिला अस्पताल या कब्रगाह? जहाँ जीवन की पहली किलकारी गूंजनी चाहिए, वहाँ आज मातम पसरा है। आए दिन जच्चा-बच्चा की मौतें सवाल खड़े कर रही हैं—क्या जिला महि

महिला अस्पताल या कब्रगाह?
जहाँ जीवन की पहली किलकारी गूंजनी चाहिए, वहाँ आज मातम पसरा है। आए दिन जच्चा-बच्चा की मौतें सवाल खड़े कर रही हैं—क्या जिला महिला अस्पताल इलाज का केंद्र है या मौत का ठिकाना?

जब देश-दुनिया में कोई ट्रंप-पुतिन से हाथ मिलाकर खुशियाँ मना रहा है, कोई सत्ता के दबदबे की गूंज में मग्न है, तब आम आदमी के घरों में सिर्फ सन्नाटा बचा है। मर रहा है तो आम नागरिक का नवजात, दम तोड़ रही है तो नवजात की माँ।

ताज़ा मामला ठाकुरापुर निवासी महिला का है, जिसकी डिलीवरी के लिए ऑपरेशन किया गया। ऑपरेशन के बाद महिला की हालत बिगड़ी, इलाज में लापरवाही बरती गई और अंततः उसकी मौत हो गई। एक नवजात की मृत्यु की भी सूचना सामने आई है। आरोप है कि समय रहते न तो उचित इलाज मिला और न ही रेफर किया गया।
देर रात इस हृदयविदारक घटना से आक्रोशित परिजनों ने अस्पताल प्रशासन के खिलाफ जमकर हंगामा किया। सवाल यह नहीं है कि हंगामा क्यों हुआ, सवाल यह है कि ऐसी नौबत बार-बार क्यों आ रही है?
अगर महिला अस्पताल में माँ और बच्चे सुरक्षित नहीं हैं, तो फिर आम आदमी जाए तो जाए कहाँ? कब जवाबदेही तय होगी, कब लापरवाही पर कार्रवाई होगी, और कब मौतों का यह सिलसिला रुकेगा—यह आज पूरे समाज का सवाल है।
जवाब मांगता है सिस्टम… जवाब मांगता है जनपद गोंडा।

Chief Minister Office Uttar Pradesh Keshav Prasad Maurya DM Gonda
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