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शीर्षक: सामुदायिक एकजुटता से स्वच्छता और जल संरक्षण का संदेश—झिरिया में हुआ श्रमदान व बोरी बंधान कार्यक्रम

**शीर्षक: सामुदायिक एकजुटता से स्वच्छता और जल संरक्षण का संदेश—झिरिया में हुआ श्रमदान व बोरी बंधान कार्यक्रम**

झिरिया ग्राम में श्री सदगुरु कबीर सेवा समिति के तत्वावधान में सामुदायिक श्रमदान स्वच्छता कार्यक्रम तथा जल संचय अभियान अंतर्गत बोरी बंधान कार्य का सफल आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य ग्राम को स्वच्छ बनाना, जल संरक्षण के प्रति जनजागरूकता बढ़ाना तथा समाज में सामूहिक प्रयास की भावना को मजबूत करना रहा। कार्यक्रम में महिला, पुरुष, युवा, बुजुर्गों के साथ-साथ बच्चों ने भी उत्साहपूर्वक भागीदारी की, जिससे यह आयोजन एक जनआंदोलन का रूप ले सका।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वरिष्ठ समाजसेवी अवध बिहारी शुक्ला रहे। विशिष्ट अतिथियों में भरोसा सेवा समिति के उपाध्यक्ष एवं खैरहन सरपंच रजनीश कुशवाहा, विद्या निर्मल समिति से राजीव द्विवेदी, लोधेश्वर सेवा समिति से संतेश्वर सिंह, परामर्शदाता रेखा सोनी तथा संचित मिश्र उपस्थित रहे। सभी अतिथियों का स्वागत आयोजक संस्था द्वारा किया गया।

कार्यक्रम की शुरुआत श्रमदान से हुई, जिसमें ग्रामीणों ने मिलकर गांव की साफ-सफाई की तथा जल बहाव वाले स्थान पर बोरी बंधान कर जल संचय की व्यवस्था की। इसके पश्चात मेधावी बच्चों और ग्राम के पंचों का सम्मान किया गया, जिससे शिक्षा, नेतृत्व और सेवा भावना को प्रोत्साहन मिला। इसके बाद श्रमदान एवं जल संरक्षण विषय पर संगोष्ठी आयोजित की गई।

मुख्य अतिथि अवध बिहारी शुक्ला ने अपने संबोधन में कहा कि श्रमदान केवल शारीरिक परिश्रम नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना का प्रतीक है। जब समाज स्वयं अपने गांव की स्वच्छता और जल संरक्षण की जिम्मेदारी लेता है, तब स्थायी विकास संभव होता है। उन्होंने जल संकट की गंभीरता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि बोरी बंधान जैसे छोटे-छोटे प्रयास भविष्य की बड़ी समस्याओं का समाधान बन सकते हैं।

रजनीश कुशवाहा ने अपने वक्तव्य में कहा कि श्रमदान से आत्मनिर्भरता की भावना जन्म लेती है। सरकारी योजनाओं के साथ यदि समाज स्वयं आगे आए, तो गांव का विकास तेज़ी से होता है। उन्होंने युवाओं और बच्चों से आह्वान किया कि वे स्वच्छता और जल संरक्षण को अपनी दैनिक आदत का हिस्सा बनाएं।

कार्यक्रम का संचालन करते हुए राजीव द्विवेदी ने श्रमदान की महत्ता पर विचार रखते हुए कहा कि सामूहिक प्रयास से ही समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाया जा सकता है। संतेश्वर सिंह और रेखा सोनी ने भी श्रमदान को सामाजिक समरसता का माध्यम बताया और महिलाओं की भागीदारी को विशेष रूप से सराहा।

अंत में आभार प्रदर्शन राघवेंद्र तिवारी द्वारा किया गया। उन्होंने सभी अतिथियों, ग्रामीणों, महिलाओं, युवाओं और बच्चों का धन्यवाद देते हुए कहा कि इसी तरह के प्रयास गांव को स्वच्छ, सुरक्षित और जल-संपन्न बनाएंगे। कार्यक्रम ने झिरिया ग्राम में श्रमदान, स्वच्छता और जल संरक्षण का सशक्त संदेश दिया।

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