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आज का भारत, और आज की पुलिस व्यवस्था पर एक सवाल


कुछ लोग कहते हैं कि उत्तर प्रदेश में फैक्ट्री या बड़ी कंपनियाँ क्यों नहीं आतीं?
जवाब अक्सर कड़वा होता है—क्योंकि यहाँ अपराध का डर है, और उससे भी बड़ा डर है कानून-व्यवस्था की उदासीनता।
नीचे की घटना पढ़िए, कहानी खुद सच्चाई बयान कर देगी—
मुंबई की सॉफ्टवेयर इंजीनियर अंकिता अपने परिवार के साथ बनारस घूमने आई थीं। इसी दौरान एक बनारसी युवक उनका मोबाइल फोन चोरी कर लेता है। अंकिता तुरंत पुलिस के पास जाती हैं और शिकायत दर्ज कराती हैं, लेकिन हमेशा की तरह पुलिस ने गंभीरता दिखाने के बजाय टालमटोल शुरू कर दी। बहाने बनाए गए, पीड़िता को ही उलझाया गया, मानो गलती उसी की हो।
कुछ घंटे बीतने के बाद अंकिता को साफ समझ आ गया कि पुलिस इस मामले में कुछ करने वाली नहीं है। तब उन्होंने अपने इंजीनियर दोस्तों की मदद ली और खुद ही मोबाइल की लोकेशन ट्रेस करवाई।
लोकेशन मिलते ही अंकिता खुद उस पते पर पहुँचीं। मकान मालिक से दरवाजा खुलवाया गया, और अंदर का नज़ारा चौंकाने वाला था—वहाँ 10 चोरी के मोबाइल फोन बरामद हुए।
जो काम पुलिस घंटों और दिनों में भी नहीं कर सकी, वह काम आम नागरिकों ने कुछ ही घंटों में कर दिखाया।
जब यह मामला मीडिया में आया और पुलिस की लापरवाही उजागर हुई, तब जाकर प्रशासन हरकत में आया। दबाव बढ़ा, और अंततः पुलिस चौकी इंचार्ज को बर्खास्त किया गया।
सवाल यही है—
अगर हर पीड़ित को खुद ही जासूस, इंजीनियर और पुलिस बनना पड़े, तो फिर व्यवस्था किस काम की?
और जब सुरक्षा का भरोसा ही न हो, तो कोई निवेशक, कोई कंपनी, कोई उद्योग यहाँ आने का जोखिम क्यों लेगा?
यह सिर्फ एक महिला की कहानी नहीं है,
यह आज के भारत और आज की पुलिस व्यवस्था पर लगा एक बड़ा सवालिया निशान है।

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