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कार्यकारी अभियंता निलेश अहिरे अपने सरकारी निवास मरम्मत निधी पर क्यूँ नहीं कर रहे खुलासा : ज्येष्ठ पत्रकार एवं सामाजिक कार्यकर्ता संजय खन्ना

जलगांव(प्रतिनिधि) : जलगांव के महाबल क्षेत्र में सिंचाई विभाग के अधिकारियों और अन्य अधिकारियों के सरकारी निवास बनाए गए हैं। इस जगह पर सरकारी निवास बी-4 जलगांव मध्यम परियोजना विभाग क्रमांक 2 के कार्यकारी अभियंता निलेश अहिरे को दिया गया है। पिछले पंद्रह-बीस दिनों से निवास की मरम्मत के लिए लाखों रुपये का बजट प्लान करने के बाद असल मरम्मत का काम शुरू हुआ है।
"कार्यकारी अभियंता निलेश अहिरे के बंगले की मरम्मत के लिए विशेष निधि उपलब्ध होना जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है।" ऐसा समाचार दिनांक 01 जनवरी 2026 को एक न्यूज पोर्टल पर प्रकाशित हुई जिसमें तापी सिंचाई विकास महामंडल महाराष्ट्र सरकार ने जलगांव मध्यम परियोजना विभाग क्रमांक 2 के कार्यकारी अभियंता निलेश अहिरे के सरकारी निवास को गोद लिया है, क्या सरकार ने आचार संहिता का उल्लंघन किया है? सरकारी इमारत की मरम्मत के लिए किसने आदेश दिया? जब सरकार के पास इस विभाग में सरकारी काम करने के लिए पैसे ही नहीं बचे हैं, तो सरकारी निवास पर लाखों रुपए कैसे खर्च किए जा रहे हैं? एक तरफ, नीलेश अहिरे के अधिकार क्षेत्र में शेलगांव बैराज ब्रिज के लिए सरकार के पास फंड नहीं बचा है, इसी तरह, सरकार ने बांध के काम के लिए कई किसानों के खेतों पर कब्जा कर लिया है, और उनके अधिकार क्षेत्र में मामले पेंडिंग हैं, इस मामले में ज्येष्ठ पत्रकार एवं सामाजिक कार्यकर्ता संजय खन्ना ने जब कार्यकारी अभियंता निलेश अहिरे से खुलासा माँगा तो वो मामले को टाल देने की बात करते नजर आए. जब संजय खन्ना ने प्रश्न किया बंगले का आधिकारिक स्वामित्व किसका है तो पहेले कार्यकारी अभियंता निलेश अहिरे बताते है कि मेरे नाम पर है और जब उनसे अलॉटमेंट लेटर माँगा गया तो उन्होंने उत्तर दिया "आप मिलने आओ ऐसे फोन पर बात नहीं होती" फिर से फोन करने पर "12 दिनों बाद आओ अभी इलेक्शन ड्यूटी है" का हवाला देते नजर आए जब आधार के तौर पर संजय खन्ना ने उन्हें प्रकाशित समाचार भेजा तो उन्होंने कहा खन्ना जी जब अपनी बात हो गई तो आप यह न्यूज क्यू वायरल कर रहे इसे सब व्हाट्सएप और फेसबुक से अभी डिलीट करो" अब प्रश्न यह है कि यदि वाकई वह बंगला कार्यकारी अभियंता निलेश अहिरे को अलॉट है और सुनिश्चित निधि लेकर वह बंगले का काम कर रहे है तो खुलासा क्यूँ नहीं करते? वह पत्रकार को मिलने के लिए क्यूँ बुलाते? जबकि अलॉटमेंट लेटर और मंजूर निधी की जानकारी वह व्हाट्सएप पर भी मुहैया करवा सकते हैं ? इन सारे प्रश्नों को लेकर संजय खन्ना ने जिलाधिकारी कार्यालय के सामने अनशन करने का इशारा दिया है.

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