logo

नई विधि से पोस्टमार्टम, होगा और आसान। ना रहेगा शक शुभा, नाही छूपेगा कोई निशान।।

होशियारपुर: 7जनवरी,2026 (बूटा ठाकुर गढ़शंकर)
प्रिय पाठको जैसे कि आप सभी जानते हो कि आज का युग टेक्नोलॉजी के रथ पर सवार होकर बहुत तेज़ी से भाग रहा है, कोई भी क्षेत्र ऐसा नहीं है जो इससे अछूता रहा हो। मानव जीवन बहुत सरल हो गया है। आए दिन कोई ना कोई नई जानकारी सामने देखने सुनने को मिल ही जाती है।
आज की नई तकनीकी जानकारी के आधार पर अब शवों का पोस्टमार्टम तेज,सटीक, विश्वसनीय और सबसे ख़ास बात यह कि बिना चीरफाड़ के हो सकेगा।
शवों की वर्चुअल ऑटोप्सी यानी बिना सर्जिकल कट पोस्टमार्टम CT स्कैन और 3D इमेजिंग के उपयोग से किया जाता है. पारंपरिक पोस्टमार्टम की तुलना में सटीक नतीजे देने वाली यह तकनीक उन परिवारों के लिए वरदान साबित होगी, जो शवों के चीर-फाड़ से अक्सर हिचकते हैं।
गौरतलब है वर्चुअल ऑटोप्सी की यह तकनीक स्विट्जरलैंड, ब्रिटेन, जर्मनी, जापान, नार्वे सहित कई देशों में पहले ही शुरू हो चुकी है. इसमें मृत शरीर को खोले बिना आंतरिक अंगों, हड्डियों और चोटों का विस्तृत विश्लेषण CT स्कैन और 3D इमेजिंग जैसी तकनीकों का उपयोग से मृत्यु का कारण पता चलता है और इससे नतीजे तेज और सटीक मिलते हैं।
वर्चुअल ऑटोप्सी की शुरूआत के बाद भोपाल देश के उन चुनिंदा शहरों में शुमार हो जाएगी, जहां अभी यह सुविधा होगी. इसके लिए भारत सरकार की स्टैंडिंग फाइनेंस कमेटी में पेश प्रस्ताव को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय से पहले ही सैद्धांतिक मंजूरी मिल चुकी है. अब वित्त मंत्रालय के प्रतिनिधि मंडल के समक्ष प्रस्ताव देंगे, जिसके बाद फंड जारी किया जाएगा।
वर्चुअल ऑटोप्सी की मंजूरी मिलने पर एम्स भोपाल मध्य प्रदेश का पहला वर्चुअल ऑटोप्सी सेंटर बन जाएगा. पारंपरिक पोस्टमार्टम की तुलना में अधिक सटीक और तेज परिणाम देने वाले वर्चुअल ऑटोप्सी से जटिल मामलों के विश्लेषण में समय की भी बचत होती है।
डिजिटल फॉर्मेट वाले वर्चुअल ऑटोप्सी के डेटा को भविष्य में किसी भी समय देखा और विश्लेषित किया जा सकता है, जिससे सबूतों की विश्वसनीयता बढ़ेगी. इस तकनीक में बारीक से बारीक चोटों और हड्डियों के फ्रैक्चर को पकड़ा जा सकता है, जो पारंपरिक तरीकों में छूट जाते हैं।
एम्स का फॉरेंसिक विभाग इस तकनीक पर काम कर रहा है और इसके लिए जरूरी CT स्कैन मशीनें और इंफ्रास्ट्रक्चर स्थापित करने की योजना है. अचानक और अस्पष्ट मौतों के कारणों का पता लगाने के लिए भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) भी इसका समर्थन कर रही है।
अब देखना होगा पूरे भारत वर्ष में यह तकनीक कब तक प्रचलित होगी।

71
10929 views