
19 वर्षीय युवक योगेश की संदिग्ध मौत, ज़हर पिलाकर हत्या का आरोप
सेवा में,
माननीय मुख्य न्यायाधीश महोदय
माननीय उच्च न्यायालय, इलाहाबाद
(लखनऊ/इलाहाबाद पीठ – यथोचित)
विषय:
19 वर्षीय युवक योगेश की षड्यंत्रपूर्वक हत्या के संबंध में भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 एवं सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000 के अंतर्गत निष्पक्ष जांच, CBI जांच आदेश एवं दोषियों व लापरवाह पुलिस अधिकारियों के विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई कराए जाने हेतु जनहित/फौजदारी शिकायत।
महोदय,
सविनय निवेदन है कि हम निम्नलिखित शिकायतकर्ता/याचिकाकर्ता हैं, जो मृतक योगेश के परिजन/मानवाधिकार कार्यकर्ता हैं एवं न्याय की अपेक्षा में यह शिकायत प्रस्तुत कर रहे हैं—
शिकायतकर्ता / याचिकाकर्ता विवरण:
मुलायम सिंह पुत्र हरदयाल सिंह
निवासी – ग्राम कासिमपुर, कसेर पोस्ट रामनगर कसेर,
थाना दादों, जनपद अलीगढ़, उत्तर प्रदेश
मोबाइल: 9368086483
हरिओम
मोबाइल: 9981968004
देव सिंह
मोबाइल: 8447623369
रजनीश
मोबाइल: 7459040821
महोदय,
दिनांक 20 दिसंबर 2025 को मृतक योगेश (उम्र 19 वर्ष) को अंकित निवासी सराय, थाना सिकंदराऊ, कृष्ण कुमार एवं शिवकुमार (पिता का नाम अज्ञात), निवासी मानई बेरिया, द्वारा बहला-फुसलाकर अपने साथ ले जाया गया।
निवेदन है कि तीसरे दिन पुष्पेंद्र (पिता का नाम अज्ञात) सहित उपरोक्त व्यक्तियों ने पूर्व नियोजित षड्यंत्र के अंतर्गत शराब में विषैला पदार्थ मिलाकर पिला दिया, जिससे योगेश की तबीयत अत्यधिक बिगड़ गई। उसे तीव्र पेट दर्द, उल्टियाँ आदि हुईं। इसके पश्चात उक्त लोग उपचार के बहाने उसे अकराबाद अस्पताल ले गए, जहाँ उसे मृत अवस्था में छोड़कर फरार हो गए।
अगले दिन पुलिस द्वारा फोन के माध्यम से मृत्यु की सूचना दी गई। अस्पताल पहुँचने पर वहाँ पुलिस के अतिरिक्त कोई अन्य व्यक्ति उपस्थित नहीं था। शव को पोस्टमार्टम हेतु भेजा गया, परंतु विसरा सुरक्षित कर जांच हेतु नहीं भेजा गया, जो कि गंभीर लापरवाही एवं साक्ष्य नष्ट करने की श्रेणी में आता है।
प्रारंभ में पुलिस द्वारा तीन संदिग्धों को हिरासत में लिया गया, किंतु अगले ही दिन बिना ठोस कार्रवाई के उन्हें छोड़ दिया गया, जिससे स्थानीय पुलिस द्वारा आरोपियों को संरक्षण दिए जाने की प्रबल आशंका उत्पन्न होती है।
प्रथम दृष्टया लागू विधिक प्रावधान:
भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023: धारा 101, 103(1), 61(2), 238, 249, 39
सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000: धारा 65, 66, 66D
(डिजिटल साक्ष्य, कॉल डिटेल, लोकेशन, संपर्क, चैट/डेटा के आधार पर)
माननीय न्यायालय से प्रार्थना:
प्रकरण की CBI द्वारा स्वतंत्र व निष्पक्ष जांच का आदेश पारित किया जाए।
विसरा, फॉरेंसिक एवं समस्त डिजिटल साक्ष्य (CDR, लोकेशन, डिवाइस डेटा) सुरक्षित कर पुनः वैज्ञानिक जांच कराई जाए।
थाना अकराबाद के संबंधित पुलिस अधिकारियों की भूमिका की स्वतंत्र न्यायिक जांच कराई जाए।
दोषियों के विरुद्ध उपरोक्त धाराओं में FIR/कार्यवाही सुनिश्चित कर कठोर वैधानिक दंड दिया जाए।
पीड़ित परिवार को सुरक्षा, संरक्षण एवं न्याय प्रदान किया जाए।
महोदय, यह मामला मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन से संबंधित है। अतः न्यायहित में शीघ्र आवश्यक आदेश पारित करने की कृपा की जाए।
भवदीय,
(शिकायतकर्ता/याचिकाकर्ता)
(मुलायम सिंह)
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स्थान: ……