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हैलट में दलालों का जाल वार्ड से ओपीडी तक पैथोलॉजी माफिया सक्रिय, स्टाफ की मिलीभगत के आरोप पहले भी कई बार पकड़े जा चुके हैं दलाल, फिर भी बेखौफ आवाजाही


हैलट में दलालों का जाल
वार्ड से ओपीडी तक पैथोलॉजी माफिया सक्रिय, स्टाफ की मिलीभगत के आरोप
पहले भी कई बार पकड़े जा चुके हैं दलाल, फिर भी बेखौफ आवाजाही


डिस्ट्रिक हेड | राहुल द्विवेदी

कानपुर। हैलट अस्पताल में पैथोलॉजी दलालों का गिरोह लगातार सक्रिय बना हुआ है। आरोप है कि यह नेटवर्क कुछ स्टाफ की मिलीभगत से ओपीडी से लेकर वार्डों तक फैल चुका है। पूर्व में कई बार ब्लड सैंपल, रोगियों के पर्चे और आधार कार्ड के साथ दलाल पकड़े जाने के बावजूद इन पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हो पाई, जिसके चलते ये बेखौफ अस्पताल परिसर में घूमते नजर आते हैं।
हैलट सहित जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के संबद्ध अस्पतालों में पैथोलॉजी दलाली का रैकेट पहले भी सामने आ चुका है। कॉलेज के प्राचार्य डॉ. संजय काला ने बीते वर्ष दिसंबर में मेडिसिन वार्ड से सैंपल लेकर जा रहे एक दलाल को पकड़ा था। उसके पास ब्लड सैंपल के साथ मरीजों के पर्चे और आधार कार्ड भी बरामद हुए थे।
मल्टी सुपर स्पेशियलिटी और इमरजेंसी में भी खुल चुके हैं मामले
करीब दो वर्ष पहले मल्टी सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में भी पैथोलॉजी दलाल पकड़े गए थे। एक तीमारदार की शिकायत पर प्राचार्य द्वारा छापा मारा गया था, जहां आउटसोर्सिंग कर्मचारियों के पास विभिन्न पैथोलॉजी लैब के कार्ड मिले थे। जांच में सामने आया कि अस्पताल से सैंपल बाहर भिजवाए जा रहे थे। इसके बाद संबंधित कर्मचारियों को हटाया गया था।
इसके अलावा हैलट इमरजेंसी में भी एक दलाल पकड़ा गया था, जिसे बाद में पुलिस के हवाले कर दिया गया। जच्चा-बच्चा अस्पताल में ब्लड सैंपल लेने पहुंचे एक दलाल को गार्ड ने पकड़ा, हालांकि बाद में उसे छोड़ दिया गया।
सस्ती और अच्छी जांच का लालच
तीन महीने पहले पैथोलॉजी विभाग के बाहर खड़े होकर मरीजों को सैंपल देने के लिए फुसलाते एक व्यक्ति को पकड़ा गया था। पूछताछ में उसने एक पैरा मेडिकल छात्र का नाम लिया था। जानकारी के मुताबिक हैलट के मेडिसिन, सर्जरी, अस्थि रोग और जच्चा-बच्चा अस्पताल के वार्डों के साथ-साथ ओपीडी के बाहर भी दलाल सक्रिय रहते हैं। मरीजों और तीमारदारों को सस्ती और बेहतर जांच का झांसा देकर सैंपल और रुपये वसूले जाते हैं।
संदिग्धों की सूची तैयार
हैलट में पैथोलॉजी दलालों का यह मकड़जाल अब तक पूरी तरह टूट नहीं पाया है। सूत्रों के अनुसार, कुछ पैरा मेडिकल स्टाफ की संलिप्तता भी पूर्व में सामने आई है। कॉलेज प्रबंधन के अधिकारियों का कहना है कि संदिग्ध लोगों की सूची तैयार की जा रही है और आगे सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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