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मनरेगा के तहत मिलने वाला काम कोई एहसान नहीं

मनरेगा के तहत मिलने वाला काम कोई एहसान नहीं, बल्कि मज़दूरों का संवैधानिक अधिकार है। आज गांव-गांव से मज़दूर इसी अधिकार की रक्षा के लिए सड़कों पर उतरने को मजबूर हैं। सरकार की नीतियों के कारण न तो समय पर काम मिल रहा है और न ही पूरी मज़दूरी का भुगतान हो पा रहा है, जो सीधे तौर पर संविधान और कानून का उल्लंघन है।
हमारी मांग है कि मनरेगा के तहत काम का कानूनी अधिकार पूरी तरह सुरक्षित रखा जाए, मज़दूरी का भुगतान समय पर और पूरा किया जाए तथा पंचायतों के अधिकारों को बहाल किया जाए। इसके साथ ही मज़दूर विरोधी VBGRAMG क़ानून को तुरंत वापस लिया जाए, क्योंकि यह कानून मनरेगा की मूल भावना और ग्रामीण रोज़गार व्यवस्था पर सीधा हमला है।
जब तक मज़दूरों के हक़ सुरक्षित नहीं होंगे, तब तक “मनरेगा बचाओ संग्राम” पूरी मजबूती के साथ जारी रहेगा।

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