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चिरकुंडा की सियासत में भूचाल: लखी सोरेन और 'पिंकी फाउंडेशन' के बीच पक रही है 'खिचड़ी' या जंग की तैयारी?

[संवाददाता, चिरकुंडा]
चिरकुंडा नगर परिषद चुनाव की तारीखों का अभी औपचारिक ऐलान भी नहीं हुआ है, लेकिन शहर का सियासी पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। शहर के चौक-चौराहों पर आज सबसे बड़ा सवाल यही है—आखिर जेएमएम (JMM) जिलाध्यक्ष लखी सोरेन के दिमाग में क्या चल रहा है?
हवा में तैरती खबरों और राजनीतिक गलियारों की सुगबुगाहट ने जनता और पार्टी कार्यकर्ताओं को भारी असमंजस में डाल दिया है। मामला 'पिंकी फाउंडेशन' (Pinky Foundation) की धमाकेदार एंट्री और जेएमएम के शीर्ष नेतृत्व के 'रहस्यमयी रुख' से जुड़ा है।
पिंकी फाउंडेशन, जो अब तक समाज सेवा का दावा करती थी, अब पूरी तरह से चुनावी मोड में आ चुकी है। फाउंडेशन की सक्रियता ने न केवल भाजपा, बल्कि इंडिया गठबंधन के नेताओं की भी नींद उड़ा दी है। लेकिन असली सस्पेंस तब गहरा गया, जब जेएमएम के जिलाध्यक्ष लखी सोरेन और पिंकी फाउंडेशन के बीच अघोषित नजदीकियों या रणनीतिक चुप्पी की खबरें सामने आने लगीं।

त्रिकोणीय मुकाबला या नया समीकरण?
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि चिरकुंडा और निरसा क्षेत्र में मुकाबला हमेशा त्रिकोणीय (Left vs BJP vs JMM) रहता है। लेकिन इस बार पिंकी फाउंडेशन के आने से यह गणित पूरी तरह बिगड़ता नजर आ रहा है।
धरातल पर स्थिति यह है कि जेएमएम का एक धड़ा पार्टी सिंबल पर लड़ने की तैयारी कर रहा है, तो दूसरा धड़ा दबी जुबान में नए विकल्पों (पिंकी फाउंडेशन) की ओर देख रहा है। यह असमंजस चिरकुंडा चुनाव को अब तक का सबसे दिलचस्प और रहस्यमयी चुनाव बना रहा है।

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