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नगर निगम चुनाव से मनरेगा तक,निर्मल सिंह का आक्रामक एलाइन, कांग्रेस सड़कों से अदालत तक लड़ेगी।


उदघाटन संस्कृति बनाम जनहित की राजनीति,पूर्व विधायक पर तीखा कटाक्ष, प्रशासन पर सुनियोजित साज़िश का आरोप।

अंबाला शहर 6 जनवरी, अंबाला शहर से कांग्रेस विधायक एवं हरियाणा के पूर्व कैबिनेट मंत्री निर्मल सिंह ने मंगलवार को अंबाला शहर के रेस्ट हाउस में लोगों की समस्याओं को सुना और मोके पर ही कुछ समस्याओं का निवारण भी किया। इस अवसर पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं की बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में निर्मल सिंह ने भाजपा सरकार, प्रशासन और पूर्व विधायक पर तीखे शब्दों में हमला बोला। उन्होंने स्पष्ट कहा कि कांग्रेस अब केवल बयानबाज़ी नहीं, बल्कि संगठित राजनीतिक संघर्ष के रास्ते पर है चाहे वह नगर निगम चुनाव हों, मनरेगा का मुद्दा हो या सामाजिक न्याय से जुड़ा आरक्षण का प्रश्न।

निर्मल सिंह ने बताया कि बैठक में दो अहम मुद्दों पर गंभीर मंथन हुआ। पहला, नगर निगम अंबाला शहर के आगामी चुनाव और दूसरा, केंद्र व राज्य सरकार द्वारा मनरेगा में किए गए बदलाव, जिन्हें उन्होंने सीधे तौर पर गरीब, मजदूर और हाशिये पर खड़े समाज के खिलाफ बताया। उन्होंने कहा कि भले ही नगर निगम की वार्डबंदी और परिसीमन का मामला न्यायालय में विचाराधीन है, लेकिन सरकार और प्रशासन जिस जल्दबाज़ी और एकतरफा सोच के साथ चुनावी तैयारियों में जुटे हैं, उससे साफ है कि लोकतांत्रिक संतुलन को दरकिनार किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने निर्णय लिया है कि इन हालात में भी चुनाव से पीछे नहीं हटेगी। 10 जनवरी को अंबाला शहर के तमाम कांग्रेस कार्यकर्ताओं की एक निर्णायक बैठक बुलाई गई है, जिसमें चुनावी रणनीति को अंतिम रूप दिया जाएगा। उन्होंने पूरे विश्वास के साथ कहा कि इस बार नगर निगम चुनाव में कांग्रेस पूरी ताकत से मैदान में उतरेगी और बहुमत के साथ जीत दर्ज करेगी।

वार्डबंदी और परिसीमन को लेकर निर्मल सिंह ने प्रशासन पर सुनियोजित भेदभाव का गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जानबूझकर एससी वर्ग के अधिकारों के साथ खिलवाड़ किया गया है। जिन आबादियों के आधार पर परिसीमन और आरक्षण तय होना चाहिए था, उन्हें दरकिनार कर दिया गया। एससी वर्ग को जो वैधानिक आरक्षण मिलना चाहिए था, वह नहीं दिया गया। उन्होंने बताया कि कांग्रेस नेता मिथुन वर्मा पार्षद द्वारा इस अन्याय को चुनौती देते हुए मामला न्यायालय में ले जाया गया है, जिसकी सुनवाई 15 जनवरी को निर्धारित है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस मुद्दे को अदालत से लेकर सड़क तक मजबूती से लड़ेगी।

मनरेगा के मुद्दे पर उन्होंने भाजपा सरकार को घेरते हुए कहा कि यह सरकार केवल नाम बदलने की राजनीति करती है। रोजगार गारंटी जैसी जनकल्याणकारी योजना को खोखला कर दिया गया है। मजदूरों के हक छीने जा रहे हैं और इसे विकास का नाम दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश कांग्रेस कमेटी के निर्णय के अनुसार, हर जिला और विधानसभा स्तर पर कांग्रेस इस जनविरोधी फैसले के खिलाफ आंदोलन चलाएगी और जनता को जागरूक करेगी।

पूर्व विधायक पर तीखा कटाक्ष करते हुए विधायक निर्मल सिंह ने कहा कि उनकी राजनीति का केंद्र केवल उद्घाटन और फोटो सेशन तक सीमित है। धरातल पर काम करने की नीयत और समझ दोनों का अभाव दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि आईएमटी का मुद्दा हो या गाँव लखनोर साहिब में माता गुजरी जी के नाम पर कॉलेज का निर्माण , इन विषयों को उन्होंने स्वयं हरियाणा विधानसभा में उठाया था। शीतकालीन सत्र में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने इन पर कार्य करने का आश्वासन दिया था और उसी का परिणाम है कि आज अंबाला को आईएमटी जैसी महत्वपूर्ण परियोजना मिल रही है। इसके बावजूद श्रेय लेने की होड़ में वे लोग खड़े हैं, जिनका इन फैसलों में कोई वास्तविक योगदान नहीं रहा।

माता गुजरी कॉलेज के मुद्दे पर उन्होंने भावुक और स्पष्ट शब्दों में कहा कि माता गुजरी जी का जन्मस्थल लखनोर साहिब गांव अंबाला में स्थित है, जहां गुरुद्वारा साहिब भी स्थापित है। यह केवल आस्था का नहीं, बल्कि सामाजिक उत्तरदायित्व का भी विषय है कि वहां बालिकाओं के लिए एक कॉलेज स्थापित किया जाए। उन्होंने बताया कि इस मांग को भी शीतकालीन सत्र में उठाया गया है और मुख्यमंत्री ने इस पर शीघ्र कार्रवाई का आश्वासन दिया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि गुरु साहिब के 350वें प्रकाश पर्व की सच्ची श्रद्धांजलि इसी रूप में दी जाएगी।

एक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विकास कार्यों के उद्घाटन का अधिकार निर्वाचित जनप्रतिनिधियों का होता है। जो स्वयं निर्वाचित नहीं हैं, उनका सरकारी कार्यक्रमों में इस प्रकार सक्रिय होना संवैधानिक मर्यादाओं के खिलाफ है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि यदि कोई व्यक्ति बेशर्मी पर उतर आए, तो उसका समाधान सरकार और प्रशासन को ही खोजना होगा।

अंत में उन्होंने दो टूक कहा कि नगर निगम चुनाव हों या मनरेगा, आरक्षण हो या शिक्षा—कांग्रेस हर मोर्चे पर जनता के साथ खड़ी है और आने वाले दिनों में अंबाला शहर की राजनीति में यह संघर्ष साफ दिखाई देगा।

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