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घायल मगरमच्छ के लिए देवदूत बनी गौ सेवा टीम: पूरनपुर में मानवता की मिसाल

रिपोर्टर में दीक्षित पीलीभीत उत्तर प्रदेश


पूरनपुर (पीलीभीत): वन्यजीवों के प्रति संवेदनशीलता और मानवता का एक अनूठा उदाहरण पूरनपुर में देखने को मिला। यहाँ नहर से निकलकर खेत में पहुँचे एक गंभीर रूप से घायल मगरमच्छ को युवाओं की टीम और वन विभाग ने मिलकर न केवल रेस्क्यू किया, बल्कि अब उसका उपचार कर उसे नया जीवन देने में जुटे हैं।
खेत में मिला लहूलुहान मगरमच्छ
घटना बीते कल की है, जब उदय करणपुर निवासी दीदार सिंह ने सुबह 8:00 बजे सूचना दी कि उनके खेत में एक मगरमच्छ पड़ा हुआ है। मगरमच्छ काफी जख्मी हालत में था और चलने-फिरने में असमर्थ था। सूचना मिलते ही गौ सेवा टीम के ठाकुर शिवम भदोरिया, गणेश जी और गोपाल जी तुरंत मौके पर पहुँचे। टीम ने वन्यजीव विशेषज्ञ अदनान खान को भी साथ लिया ताकि सुरक्षित रेस्क्यू किया जा सके।
मौके पर ही शुरू किया प्राथमिक उपचार
मगरमच्छ की तड़प देख टीम ने बिना देरी किए वन विभाग को सूचित किया। विभाग की टीम के पहुँचने तक युवाओं ने हिम्मत दिखाते हुए बीटाडिन स्प्रे से मगरमच्छ के जख्मों को साफ किया। इसके बाद उसे सावधानीपूर्वक पिंजरे में रखकर वन विभाग ले जाया गया।
जटिल ऑपरेशन और सेवा का संकल्प
वन विभाग पहुँचकर डॉक्टर अमरेश गंगवार के नेतृत्व में मगरमच्छ का इलाज शुरू हुआ। घाव इतने गहरे थे कि संक्रमण फैलने के डर से उसकी जीभ और मुँह का कुछ सड़ा हुआ हिस्सा काटना पड़ा। वर्तमान में उसके मुँह की बैंडेज की जा रही है।
हाथों से खिलाया खाना: गंभीर चोट के कारण मगरमच्छ खुद खाने में असमर्थ था, जिसे टीम के सदस्यों ने रात में अपने हाथों से खाना खिलाया।
इनका रहा विशेष सहयोग
इस पूरे रेस्क्यू और सेवा अभियान में ठाकुर उद्देश्य सिंह जादौन, अदनान खान, कपिल सर, सुरेश सर, गणेश जी, गोपाल जी और दीदार सिंह का विशेष सहयोग रहा। वन विभाग पूरनपुर की टीम भी मगरमच्छ के खान-पान की जिम्मेदारी बखूबी निभा रही है।
"जब तक मगरमच्छ पूरी तरह स्वस्थ नहीं हो जाता, हम डॉक्टर साहब के साथ मिलकर सुबह-शाम उसका इलाज और सेवा जारी रखेंगे। पूर्ण स्वस्थ होने के बाद ही उसे सुरक्षित प्राकृतिक आवास में आजाद किया जाएगा।"
— ठाकुर शिवम सिंह भदोरिया (गौ सेवा टीम/राष्ट्रीय बजरंग दल, पूरनपुर)

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