
संतरामपुर के आदिवासी अंचल में विकास की नई सुगबुगाहट; शिक्षा, जल और संस्कृति के संरक्षण पर अर्जुनसिंह पारगी की विशेष पहल
दिनांक: 05 जनवरी, 2026
स्थान
संतरामपुर के आदिवासी अंचल में विकास की नई सुगबुगाहट; शिक्षा, जल और संस्कृति के संरक्षण पर अर्जुनसिंह पारगी की विशेष पहल
दिनांक: 05 जनवरी, 2026
स्थान: संतरामपुर (महिसागर)
संतरामपुर के आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों में मूलभूत समस्याओं के समाधान और सांस्कृतिक गौरव को पुनः स्थापित करने के लिए एक व्यापक कार्ययोजना पर संवाद प्रारंभ किया गया है। स्थानीय प्रतिनिधि और समाजसेवी अर्जुनसिंह पारगी ने क्षेत्र के विकास के लिए पाँच मुख्य बिंदुओं पर मीडिया के माध्यम से अपनी प्राथमिकताएं साझा की हैं:
1. शिक्षा: डिजिटल और जमीनी स्तर पर सुधार
संतरामपुर के दूरदराज के गांवों में शिक्षा की पहुंच और गुणवत्ता बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा। अर्जुनसिंह पारगी का मानना है कि जब तक आदिवासी छात्र आधुनिक तकनीक और प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए तैयार नहीं होंगे, तब तक वास्तविक विकास अधूरा है।
2. बेरोजगारी: स्थानीय कौशल को मिलेगा बाजार
क्षेत्र के युवाओं को पलायन से रोकने के लिए स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन की योजना है। वनोपज और हस्तशिल्प को 'ब्रांड संतरामपुर' के रूप में विकसित कर युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने का लक्ष्य है।
3. जल संकट: 'हर खेत को पानी' का संकल्प
पहाड़ी भूभाग होने के कारण जल स्तर की समस्या का समाधान प्राथमिकता है। पारंपरिक जल स्रोतों के पुनरुद्धार और नई जल संचय परियोजनाओं के माध्यम से कृषि और पेयजल की समस्या को दूर करने का आह्वान किया गया है।
4. बोली और भाषा: पहचान का गौरव
संतरामपुर की स्थानीय बोली यहाँ की आत्मा है। अर्जुनसिंह पारगी ने जोर दिया कि नई पीढ़ी अपनी मातृभाषा और बोली को गर्व से अपनाए। इसके लिए संवाद कार्यक्रमों में स्थानीय भाषा के प्रयोग को बढ़ावा दिया जाएगा।
5. 'आदिवासी अकादमी' की स्थापना का विजन
क्षेत्र में एक समर्पित 'आदिवासी अकादमी' की स्थापना का प्रस्ताव रखा गया है। यह अकादमी:
आदिवासी इतिहास, लोक गीतों और परंपराओं का शोध केंद्र बनेगी।
युवाओं के लिए कौशल विकास और करियर काउंसलिंग का केंद्र होगी।
अर्जुनसिंह पारगी का संदेश:
"हमारा लक्ष्य संतरामपुर के हर आदिवासी परिवार तक शिक्षा और पानी पहुँचाना है। हम अपनी बोली और भाषा को बचाते हुए आधुनिक दुनिया के साथ कदम से कदम मिलाकर आगे बढ़ेंगे।"