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फर्जी दस्तावेजों से कब्जाई गई सरकारी जमीन पर सख्त कार्रवाई राज्यभर में होगी पहचान, अवैध कब्जेदारों से मुक्त कराई जाएगी भूमि

पटना।
राज्य में फर्जी तरीके से दस्तावेज तैयार कर कब्जा की गई सरकारी जमीनों के खिलाफ अब सख्त कार्रवाई की तैयारी है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने ऐसे सभी मामलों की गहन जांच का निर्णय लिया है, जिनमें सरकारी जमीन को कूटरचित कागजों के आधार पर निजी स्वामित्व में दर्शाया गया है। विभाग का स्पष्ट निर्देश है कि चिन्हित जमीनों को अवैध कब्जेदारों से मुक्त कराकर राज्य के विकास कार्यों में उपयोग किया जाएगा।
विभागीय सूत्रों के अनुसार, राज्य के कई अंचलों में सरकारी भूमि पर फर्जी जमाबंदी, दाखिल-खारिज और गलत तरीके से रजिस्ट्रेशन कराए जाने के मामले सामने आए हैं। इन मामलों में यह भी पाया गया कि स्पष्ट अनियमितता के बावजूद कई स्थानों पर अंचल स्तर से प्राथमिकी दर्ज नहीं कराई गई, जिसे गंभीर प्रशासनिक लापरवाही माना गया है। अब ऐसे मामलों की विशेष समीक्षा की जा रही है।

जमाबंदी और दाखिल-खारिज की होगी गहन जांच
राजस्व विभाग ने सभी अंचलाधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे अपने-अपने क्षेत्र में सरकारी भूमि की जमाबंदी की जांच करें। इस दौरान यह देखा जाएगा कि दाखिल-खारिज और नई जमाबंदी किस आधार पर की गई। यदि भूमि पहले सरकारी अभिलेखों में सरकार के नाम दर्ज थी, तो यह स्पष्ट किया जाएगा कि किस परिस्थिति में वह निजी व्यक्ति के नाम चढ़ाई गई।
जांच के दौरान रजिस्ट्रेशन कार्यालयों के रिकॉर्ड, खतियान, नक्शा और ऑनलाइन भूमि अभिलेखों का मिलान भी किया जाएगा, ताकि किसी भी स्तर पर हुई गड़बड़ी को चिन्हित किया जा सके।

अंचलाधिकारियों पर बढ़ी जिम्मेदारी
विभाग ने आगे ऐसे मामलों की पुनरावृत्ति रोकने के लिए अंचलाधिकारियों की जिम्मेदारी तय कर दी है। निर्देश के अनुसार, यदि किसी सरकारी जमीन पर फर्जी दस्तावेज के आधार पर कब्जे का प्रयास सामने आता है, तो संबंधित अंचलाधिकारी को अनिवार्य रूप से स्थानीय थाना में प्राथमिकी दर्ज करानी होगी। ऐसा नहीं करने की स्थिति में संबंधित अधिकारी के खिलाफ भी विभागीय कार्रवाई की जा सकती है।

फर्जीवाड़ा पकड़ में आने पर होगी सख्त कानूनी कार्रवाई
जांच में फर्जीवाड़ा साबित होने पर प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत पहले जमीन के अभिलेख दुरुस्त किए जाएंगे और फिर अवैध कब्जेदारों से भूमि को मुक्त कराया जाएगा। इसके साथ ही धोखाधड़ी में शामिल लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
भारतीय न्याय संहिता, 2023 के तहत कूटरचना, कूटरचित दस्तावेज का उपयोग, छल, रिआयत के नाम पर धोखा तथा आपराधिक षड्यंत्र जैसी धाराओं में मुकदमा दर्ज किया जा सकता है। विभाग का कहना है कि किसी भी स्तर पर संलिप्त पाए जाने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।

विकास कार्यों में होगा भूमि का उपयोग
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के अनुसार, अवैध कब्जे से मुक्त कराई गई सरकारी जमीन का उपयोग स्कूल, अस्पताल, सड़क, आवासीय योजना और अन्य जनहित के विकास कार्यों में किया जाएगा। इससे न केवल सरकारी संपत्ति की सुरक्षा होगी, बल्कि योजनाओं के क्रियान्वयन में भी तेजी आएगी।
राज्य सरकार की इस पहल को भूमि माफियाओं पर बड़ी कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा है, जिससे आने वाले समय में सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे के मामलों में कमी आने की उम्मीद है।

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