logo

पंचायत चुनाव 2026: एक ही जनगणना पर तीसरी बार तय होगा आरक्षण*, *जानिए क्या बदल जाएगा उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत*

ओमप्रकाश सिंह AIMA NEWS चुनावों की आहट के बीच आरक्षण को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है। प्रदेश के पंचायत चुनाव के इतिहास में यह पहली बार होने जा रहा है जब एक ही जनगणना (2011) के आंकड़ों पर तीसरी बार आरक्षण व्यवस्था लागू की जाएगी। आमतौर पर हर 10 साल में होने वाली नई जनगणना के आधार पर आरक्षण की सीटों में फेरबदल होता है, लेकिन इस बार परिस्थितियां अलग हैं।
क्यों लिया गया यह फैसला?
नियमतः एक जनगणना के आधार पर अधिकतम दो बार ही चुनाव कराए जाते रहे हैं।
* 1991 की जनगणना: 1995 और 2000 के चुनाव हुए।
* 2001 की जनगणना: 2005 और 2010 के चुनाव हुए।
* 2011 की जनगणना: 2015 और 2021 के चुनाव संपन्न हुए।
वर्ष 2021 में प्रस्तावित राष्ट्रीय जनगणना कोरोना काल और अन्य तकनीकी कारणों से नहीं हो सकी। चूंकि 2026 के चुनावों के लिए नई जनगणना के आधिकारिक आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं, इसलिए सरकार के पास 2011 की जनगणना को ही आधार मानने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है।
आरक्षण का गणित और प्रमुख नियम
पंचायत चुनाव में पदों का बंटवारा एक निर्धारित प्रतिशत के तहत होता है, जो इस बार भी यथावत रहेगा:
* पिछड़ा वर्ग (OBC): 27 प्रतिशत आरक्षण।
* अनुसूचित जाति (SC): 21 प्रतिशत आरक्षण।
* महिला आरक्षण: सभी वर्गों के आरक्षित पदों में 33 प्रतिशत सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी।
*चक्रानुक्रम (Rotation) प्रक्रिया पर असर*
आरक्षण लागू करने की प्रक्रिया में सबसे पहले अनुसूचित जनजाति (ST), फिर अनुसूचित जाति (SC) और अंत में पिछड़ा वर्ग (OBC) की सीटें तय की जाती हैं।
इस बार सबसे दिलचस्प बात यह होगी कि सीटों का आवंटन 'छोड़कर' (Exclusion method) किया जाएगा। यानी वर्ष 2015 और 2021 के चुनावों में जो सीटें जिस वर्ग के लिए आरक्षित की जा चुकी हैं, उन्हें छोड़कर शेष बची सीटों पर उस वर्ग का दावा पहले बनेगा। इससे उन गांवों या वार्डों में नए समीकरण बनेंगे जहाँ लंबे समय से आरक्षण का लाभ नहीं मिला है।
*चुनौती: बदली हुई आबादी और पुराने आंकड़े*
विशेषज्ञों का मानना है कि 2011 से 2026 के बीच (15 वर्षों में) कई पंचायतों की जनसंख्या और जातिगत समीकरण पूरी तरह बदल चुके हैं। कई गांवों में किसी विशेष वर्ग की आबादी बढ़ी है तो कहीं घटी है। ऐसे में पुराने आंकड़ों पर आरक्षण लागू होने से जमीनी स्तर पर असंतोष या राजनीतिक चुनौतियां देखने को मिल सकती हैं।
निष्कर्ष: 2026 का पंचायत चुनाव प्रशासनिक दृष्टिकोण से चुनौतीपूर्ण होगा क्योंकि पुरानी जनगणना पर आधारित यह 'हैट्रिक' आरक्षण व्यवस्था कई सीटों के समीकरण उलट-पुलट सकती है।

0
98 views