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नासिक में चुनाव की हवा: सियासी सरगर्मी चरम पर

नासिक संवादाता: मो. जावेद शेख

नासिक शहर और ज़िले में इन दिनों चुनावी माहौल पूरी तरह गरमा चुका है। जैसे-जैसे मतदान की तारीख़ क़रीब आ रही है, वैसे-वैसे सियासी गतिविधियां तेज़ होती जा रही हैं। शहर की मुख्य सड़कों से लेकर अंदरूनी इलाकों तक झंडे, बैनर, पोस्टर और होर्डिंग्स नज़र आ रहे हैं। हर पार्टी अपने-अपने दावे और वादों के साथ मैदान में डटी हुई है।
इस बार चुनाव में स्थानीय मुद्दे सबसे अहम बनकर उभरे हैं। महंगाई, बेरोज़गारी, पानी की किल्लत, ट्रैफिक जाम, सड़कें और बुनियादी सुविधाओं का सवाल हर नुक्कड़ सभा में उठ रहा है। खास तौर पर पानी की समस्या और शहर के तेज़ी से बढ़ते ट्रैफिक को लेकर जनता में नाराज़गी देखी जा रही है।
युवा मतदाता इस चुनाव में अहम भूमिका निभाते नज़र आ रहे हैं। रोज़गार, शिक्षा और भविष्य की सुरक्षा उनके मुख्य मुद्दे हैं। युवा वर्ग बदलाव और नए नेतृत्व की बात कर रहा है, जबकि वरिष्ठ नागरिक अनुभव और स्थिर प्रशासन को तरजीह दे रहे हैं। महिलाओं से जुड़े मुद्दे भी अब चुनावी भाषणों का हिस्सा बनते जा रहे हैं।
राजनीतिक दलों के बीच सीधा मुकाबला दिखाई दे रहा है। पुराने जनप्रतिनिधियों के कामकाज पर सवाल उठ रहे हैं और नए चेहरे खुद को विकल्प के तौर पर पेश कर रहे हैं। कुछ क्षेत्रों में अंदरूनी गुटबाज़ी भी चर्चा का विषय बनी हुई है, जिसका असर चुनावी गणित पर पड़ सकता है।
इस बार सोशल मीडिया भी चुनाव का बड़ा हथियार बन गया है। वीडियो, पोस्ट और लाइव भाषणों के ज़रिये मतदाताओं तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है। आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी तेज़ है, जिससे चुनावी माहौल और गर्म हो गया है।
कुल मिलाकर नासिक का चुनाव इस बार सिर्फ़ जीत-हार का नहीं, बल्कि भरोसे और उम्मीदों का इम्तिहान बन गया है। जनता किसे मौका देती है, यह तो आने वाला वक़्त बताएगा, लेकिन इतना साफ़ है कि नासिक की चुनावी हवा इस बार काफ़ी तेज़ और असरदार है।

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