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रुद्रपुर में कल्याणी और बेगुल नदियां प्रदूषण की चपेट में, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की भूमिका पर उठे गंभीर सवाल #upendrasingh

रुद्रपुर - जिले की प्रमुख कल्याणी और बेगुल नदियां इन दिनों गंभीर प्रदूषण का दंश झेल रही हैं। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि नदियों में खुलेआम दूषित और रासायनिक अपशिष्ट गिराया जा रहा है, जिससे बड़ी संख्या में मछलियों की मौत हो रही है। इसका सीधा असर किसानों, ग्रामीणों और पर्यावरण पर पड़ रहा है। इससे भी ज्यादा चिंता की बात यह है कि पूरे मामले में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की भूमिका सवालों के घेरे में आ गई है।
करीब दो महीने पहले कल्याणी नदी में रासायनिक पदार्थ डाले जाने से भारी संख्या में मछलियों की मौत हो गई थी। इस घटना के बाद प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और जिला प्रशासन ने औपचारिक सक्रियता दिखाते हुए जांच के आदेश जारी किए थे। पानी के सैंपल लेने और दोषियों पर कार्रवाई का भरोसा भी दिया गया था, लेकिन हकीकत यह है कि आज तक न तो जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की गई और न ही किसी फैक्टरी या जिम्मेदार इकाई पर ठोस कार्रवाई दिखाई दी। नतीजतन, कल्याणी नदी में आज भी दूषित पानी लगातार बह रहा है।
बेगुल नदी में भी जहर से मरी मछलियां
कुछ दिन पहले बेगुल नदी में भी मछलियों के मरने की घटना सामने आई थी। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि कुछ औद्योगिक कंपनियां रात के अंधेरे में रासायनिक अपशिष्ट सीधे नदी में छोड़ देती हैं। इससे नदी का पानी जहरीला हो रहा है और जलीय जीवों के साथ-साथ आसपास के खेतों और भूजल पर भी खतरा मंडरा रहा है। इसके बावजूद प्रदूषण फैलाने वालों पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो पाई है।
जांच रिपोर्ट का इंतजार
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से कल्याणी नदी की जांच से संबंधित अब तक कोई रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की गई है। प्रशासन का कहना है कि अधिकारियों को जल्द रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। बेगुल नदी में रसायन डालने के मामले में भी जांच के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
इस संबंध में एडीएम पंकज उपाध्याय ने कहा कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से जल्द रिपोर्ट मांगी गई है और जांच पूरी होने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। वहीं, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी आरपी सिंह का कहना है कि बेगुल नदी की सैंपलिंग कराई जा चुकी है और विस्तृत जांच की जा रही है। रिपोर्ट तैयार होते ही जिलाधिकारी को सौंप दी जाएगी और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल, लगातार हो रहे प्रदूषण और कार्रवाई में देरी से लोगों में रोष बढ़ता जा रहा है। पर्यावरण प्रेमियों और ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले समय में नदियों का अस्तित्व ही खतरे में पड़ सकता है।

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