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उत्तर प्रदेश पुलिस का कारनामा भ्रष्टाचार में लिप्त पुलिस अधिकारी के खिलाफ हुई कार्यवाही से नाराज भ्रष्टाचार को उजागर करने वाले पत्रकार पर FIR दर्ज

यूपी में फिर एक पत्रकार पर एफआईआर।

और वो भी उस अधिकारी द्वारा जिसे रिश्वतखोरी का वीडियो वायरल होने के बाद निलंबित किया जा चुका है।

जिसके बारे में निजी बिल्डर को अनुचित लाभ पहुंचाने की विभागीय चिट्ठी है।

इन्हीं सब तथ्यों की रिपोर्ट करने पर लखनऊ के पत्रकार राजवीर सिंह पर बिना किसी जांच पड़ताल या पूछताछ के ही एफआईआर करा दी गई।

जबकि बाकायदा आवास विकास परिषद के जोनल आय़ुक्त/अधीक्षण अभियंता की रिपोर्ट है,

कि उक्त अधिकारी निपेंद्र बहादुर सिंह ने बिल्डर को 7 करोड़ का अनुचित लाभ पहुंचाया।

सारा कुछ सरकारी कागजों पर है।

इसके बावजूद आवास विकास परिषद के प्रशासनिक अधिकारी नृपेंद्र बहादुर सिंह ने,

पत्रकार राजवीर सिंह पर ही ब्लैकमेलिंग, रंगदारी, उगाही, वसूली जैसे आरोप लगाकर एफआईआर दर्ज करा दी गई।

लखनऊ के गाजीपुर थाने में ये एफआईआर बिजली की तेजी से दर्ज भी कर ली गई।

मतलब आपके पास सत्ता की ताकत आ गई है तो आप कुछ भी करेंगे?

सवाल उठाने पर अमिताभ ठाकुर को 25 साल पुराने मुकदमे में, 25 साल बाद एफआईआर करके जेल में ठूंस देंगे।

भ्रष्टाचार का खुलासा करने पर पत्रकार पर एफआईआर करा देंगे।

और इन उपायों से हिंदू-मुस्लिम की आड़ में धान के खेत में पराली सा लहलहाते इस भ्रष्ट तंत्र के कुकर्म छिपा लेंगे?

पत्रकार ने सच लिख दिया तो जि़ल्ल ए इलाही की शान में अपमान है?

और कोडीन माफिया, खनन माफिया, राशिद नसीम माफिया को खुल्लम खुल्ला अभयदान है?

आनंद कुमार त्रिपाठी
उत्तर प्रदेश

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