
बिना अनुमति के वन भूमि से काट दिये गये हजारों हरे पेड़
जिले के जनपद पंचायत रामपुर नैकिन के अन्तर्गत ग्राम पंचायत पटना के छुहिया से पहाड़ की वन भूमि पर हजारों पेड़ सगौन और अन्य हरे पेड़ पेड़ डीबीएल कंपनी ने बिना विभागीय अनुमति लिए काट दिया गया।
हर घर नल जल योजना के तहत कार्य करने में लगी डीबीएल कंपनी द्वारा छुहिया घाटी में बिना अनुमति लिए ही सागौन के हजारों पेंड़ काट दिए। मामले की जानकारी होने पर जनपद पंचायत रामपुर नैकिन के उपाध्यक्ष ऋषिराज मिश्रा ने डीएफओ सीधी से मामले की लिखित शिकायत की है। शिकायत में कहा गया है कि डीबीएल कंपनी द्वारा अनाधिकृत रूप से वन संपदा की क्षति की गई है। जिस पर त्वरित जांच एवं कार्रवाई की जाए। दरअसल वन परिक्षेत्र चुरहट अंतर्गत सर्किल बधवार के वन बीट
मझिगवां कक्ष क्रमांक 1121 ग्राम पटना सरदा की सीमा सरहद पर वन प्रजातीय वन संपदा से आच्छादित कैमोर पहाड़ वन भूमि पर निर्माण कार्य एजेंसी
डीबीएल कंपनी द्वारा किए जा रहे पानी टंकी निर्माण एवं पाइप लाइन के बिछाव में अनाधिकृत रूप से वन संपदा को व्यापक पैमाने पर क्षति पहुंचाई गई है।
प्रत्यक्ष जानकारी अनुसार पहाड़ के निचले सतह से ऊपर तक लगभग डेढ़ किलोमीटर की लंबाई तथा 10 मीटर की चौड़ाई की परिधि में किए गए पाइप लाइन के बिछाव एवं ऊपर ही निर्माणाधीन पानी की टंकी के भू-क्षेत्र में स्थित रहे हजारों की संख्या में सागौन, आम, सरई, तेंदू आदि बेसकीमती वृक्षों का कटाव किया गया। कंपनी के नुमाइंदों द्वारा सीधी जिले के सीमा पर स्थित पटना में पाइप लाइन का बिछाव करने के लिए एवं ऊपर पानी टंकी के निर्माण के लिए पाइप लाइनों को बिछाने के लिए तीन मोटर वृक्षों की कटाई के लिए एफआरए अनुमति का आवेदन दिया गया था। जबकि पाइप लाइन का कार्य 8 माह पहले ही पूर्ण कर लिया गया था। कंपनी की ओर से एफआरए आवेदन पर अभी तक कोई अनुमति नहीं मिली है। अब कंपनी की ओर से यह प्रयास किया जा रहा है कि बेशकीमती वृक्षों की कटाई के
बाद उसे रिकार्ड में लगाने के लिए अनुमति पत्र मिल जाए।
डीएफओ कंपनी पर करें कार्रवाईः ऋषिराज
जनपद पंचायत क्षेत्र रामपुर नैकिन के उपाध्यक्ष ऋषिराज मिश्रा ने कहा है कि सीधी जिला बार्डर पर स्थित पटना में हर घर नल जल योजना के कार्य में लगी दिलीप बिल्डिकान कंपनी द्वारा एफआरए परमीशन बिना मिले ही मनमानी तौर पर छुहिया घाटी में हजारों वृक्षों की कटाई करा दी गई। तीन मीटर क्षेत्र के लिए परमीशन आवेदन काम करने के बाद दिया गया। उसमें भी अभी तक विभागीय अनुमति नहीं मिली है। तत्संबंध में कंपनी की मनमानी को लेकर उनके द्वारा वन मंडल पश्चिम सीधी डीएफओ को लिखित आवेदन देकर जांच एवं कार्रवाई की मांग की गई है।