
भूमि मामलों में फर्जी दस्तावेज पर सख्ती, अब अनिवार्य होगी एफआईआर : राजस्व विभाग
पटना।
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने भूमि से जुड़े मामलों में जाली, कूटरचित एवं मिथ्या दस्तावेजों पर कड़ा रुख अपनाया है। विभाग के अनुसार ऐसे मामलों में फर्जी कागजात प्रस्तुत करने वालों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज करना अब अनिवार्य कर दिया गया है। इस संबंध में विभाग के सचिव गोपाल मीणा ने सभी अंचलाधिकारियों को स्पष्ट निर्देश जारी करते हुए पत्र भेजा है।
राजस्व विभाग के मुताबिक यदि किसी भी भू-राजस्व कार्यवाही के दौरान प्रथम दृष्टया जाली, कूटरचित अथवा मिथ्या दस्तावेज सामने आते हैं, तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ स्थानीय थाना में अनिवार्य रूप से एफआईआर दर्ज करायी जाएगी। यह निर्देश उपमुख्यमंत्री सह राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा की पहल पर चल रहे भूमि सुधार जन कल्याण संवाद के दौरान प्रमंडलीय मुख्यालयों में आयोजित जनसंवाद कार्यक्रमों में सामने आए तथ्यों के आधार पर जारी किया गया है।
विभाग ने बताया कि नामांतरण, दाखिल-खारिज, परिमार्जन प्लस, बंदोबस्ती, सीमांकन, भू-अर्जन तथा सार्वजनिक भूमि से जुड़े मामलों में कई बार फर्जी दस्तावेजों के सहारे प्रशासन को गुमराह करने की कोशिश की जाती रही है, जिसे अब किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
राजस्व विभाग के अनुसार सरकारी भूमि से जुड़े मामलों में संबंधित अंचलाधिकारी स्वयं स्थानीय थाना में प्राथमिकी दर्ज कराएंगे। वहीं निजी अथवा रैयती भूमि के विवाद में जांच के उपरांत अंचलाधिकारी या राजस्व पदाधिकारी की अनुशंसा पर परिवादी के आवेदन के आधार पर एफआईआर दर्ज की जाएगी।
विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि जाली दस्तावेज के आधार पर कोई भी आदेश पारित नहीं किया जाएगा। यदि पूर्व में इस तरह का कोई आदेश पारित हो चुका है, तो उसकी विधि-सम्मत समीक्षा कर नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।