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*जयपाल सिंह मुंडा (JSM) मेंटरशिप कार्यक्रम का शुभारंभ.. हाशिए पर रहने वाले विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा तक पहुँच में सहयोग*

रांची | 3 जनवरी 2026 एसोसिएशन फॉर परिवर्तन ऑफ नेशन (APNA) ने आज जयपाल सिंह मुंडा (JSM) मेंटरशिप कार्यक्रम की औपचारिक शुरुआत की। यह पहल दलित, बहुजन, आदिवासी एवं अन्य हाशिए पर स्थित समुदायों से आने वाले विद्यार्थियों को विदेशों में उच्च शिक्षा के अवसरों तक पहुँच दिलाने के उद्देश्य से प्रारंभ की गई है। यह कार्यक्रम निःशुल्क है और विशेष रूप से उन छात्रों के लिए तैयार किया गया है जो संसाधनों, मार्गदर्शन और संरचित सहयोग के अभाव में आगे नहीं बढ़ पाते।
यह मेंटरशिप कार्यक्रम उन विद्यार्थियों को लक्षित करता है जो उच्च शिक्षा के लिए आवश्यक जानकारी, उपयुक्त मार्गदर्शन और संस्थागत सहयोग के अभाव में पीछे रह जाते हैं। कार्यक्रम के अंतर्गत छात्रों को शैक्षणिक मार्गदर्शन, आवेदन प्रक्रिया में सहयोग, छात्रवृत्तियों से संबंधित जानकारी तथा उच्च शिक्षा से जुड़े महत्त्वपूर्ण निर्णयों में निरंतर मेंटरशिप प्रदान की जाएगी। यह पहल महान स्वतंत्रता सेनानी, दूरदर्शी नेता एवं आदिवासी समाज के अधिकारों के लिए आजीवन संघर्ष करने वाले स्वर्गीय मरांग गोमके जयपाल सिंह मुंडा की जयंती के अवसर पर प्रारंभ की गई है। कार्यक्रम के दौरान, एमडी फैजान, सचिव, अपना, ने कहा कि मरांग गोमके जयपाल सिंह मुंडा न केवल एक असाधारण विद्वान थे, बल्कि उन्होंने अपनी प्रतिभा और नेतृत्व क्षमता से देश और समाज को नई दिशा दी। उन्होंने प्रतिष्ठित भारतीय सिविल सेवा परीक्षा में उत्कृष्ट सफलता प्राप्त की और ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के सेंट जॉन्स कॉलेज से इतिहास की पढ़ाई की, जहाँ वे अपनी बौद्धिक क्षमता और आत्मसम्मानपूर्ण व्यक्तित्व के लिए जाने गए। उन्होंने यह भी कहा कि जयपाल सिंह मुंडा एक प्रतिभाशाली खिलाड़ी थे और 1928 के एम्स्टर्डम ओलंपिक में भारतीय हॉकी टीम का नेतृत्व करते हुए देश को उसका पहला ओलंपिक स्वर्ण पदक दिलाया। उनका जीवन नेतृत्व, साहस और सामाजिक न्याय के प्रति अटूट प्रतिबद्धता का प्रतीक रहा है।
कार्यक्रम प्रमुख उषा तिरु ने कहा, _“किसी भी प्रतिभाशाली छात्र को केवल सही मार्गदर्शन के अभाव में पीछे नहीं रहना चाहिए। जयपाल सिंह मुंडा मेंटरशिप का उद्देश्य यही है कि छात्रों को वैश्विक अवसरों तक पहुँचने के लिए आवश्यक सहयोग, मार्गदर्शन और आत्मविश्वास मिल सके।”_
प्रेस से बातचीत करते हुए कार्यक्रम निदेशक हुनर मलिक ने कहा कि दलित, आदिवासी और अन्य हाशिए पर रहने वाले समुदायों से आने वाले छात्रों को वैश्विक उच्च शिक्षा तक पहुँचने में कई संरचनात्मक बाधाओं का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा, _“इन छात्रों को अक्सर सही जानकारी, अकादमिक मार्गदर्शन, वित्तीय परामर्श और अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक परिवेश की समझ नहीं मिल पाती। यही असमानताएँ उनके सपनों को वास्तविक अवसरों में बदलने से रोकती हैं। हमारा प्रयास इन बाधाओं को व्यवस्थित रूप से कम करना है।”_
कार्यक्रम समन्वयक सपना गुप्ता, जो यूनिवर्सिटी ऑफ एडिनबरा (स्कॉटलैंड) से स्नातक हैं, ने कहा, _“पहली पीढ़ी के और हाशिए पर मौजूद छात्रों के लिए सफलता को केवल प्रवेश या छात्रवृत्ति तक सीमित नहीं किया जा सकता। हम सफलता को आत्मविश्वास, तैयारी, सूचित निर्णय लेने और अवसरों तक वास्तविक पहुँच के रूप में देखते हैं।”_
नेशनल ओवरसीज़ स्कॉलरशिप प्राप्तकर्ता एवं यूनिवर्सिटी ऑफ ससेक्स (यूके) में पीएचडी शोधार्थी मनीष सुरिन ने कहा, _“जब हाशिए पर रहने वाले छात्रों को संरचित मार्गदर्शन, मनोसामाजिक सहयोग और वैश्विक शैक्षणिक प्रणालियों की समझ मिलती है, तब वे न केवल आवेदन प्रक्रियाओं को बेहतर ढंग से समझ पाते हैं, बल्कि आत्मविश्वास के साथ अंतरराष्ट्रीय अवसरों की ओर भी बढ़ते हैं।”_ वहीं एसओएएस (SOAS), यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन से जुड़े एवं एमजीओएस स्कॉलर हर्क्यूलिस मुंडा ने कहा, _“इस तरह के कार्यक्रम छात्रों को केवल जानकारी ही नहीं, बल्कि आत्मबल, दिशा और वैश्विक दृष्टिकोण भी प्रदान करते हैं, जो किसी भी छात्र की शैक्षणिक यात्रा के लिए अत्यंत आवश्यक है।”_ APNA की जनसंपर्क एवं साझेदारी प्रमुख निधि सुमन ने कहा, _“यह मेंटरशिप कार्यक्रम उन छात्रों के लिए एक सशक्त मंच है, जो बड़े सपने देखते हैं लेकिन संसाधनों के अभाव में आगे नहीं बढ़ पाते। हमारा उद्देश्य ज्ञान और अवसरों तक पहुँच को सभी के लिए सुलभ बनाना है।”_ यह मेंटरशिप कार्यक्रम विशेष रूप से झारखंड के दलित, बहुजन, आदिवासी एवं अन्य वंचित समुदायों के उन छात्रों के लिए तैयार किया गया है जो वर्ष 2026–27 में विदेशों में उच्च शिक्षा एवं छात्रवृत्तियों के लिए आवेदन करना चाहते हैं। कार्यक्रम के अंतर्गत चयनित विद्यार्थियों को व्यक्तिगत मेंटरशिप, आवेदन प्रक्रिया में सहयोग, स्टेटमेंट ऑफ पर्पज़ (SOP) लेखन, सिफ़ारिश पत्रों की तैयारी, इंटरव्यू मार्गदर्शन, प्री-डिपार्चर ओरिएंटेशन तथा समूह आधारित कार्यशालाओं का लाभ मिलेगा। इस पहल के अंतर्गत प्रतिवर्ष कम से कम 25 छात्रों को गहन मेंटरशिप तथा 100 से अधिक छात्रों तक प्रमाणिक जानकारी और मार्गदर्शन पहुँचाने का लक्ष्य रखा गया है। दीर्घकालिक रूप से यह कार्यक्रम एक ऐसे आत्मनिर्भर मेंटरशिप मॉडल के निर्माण की दिशा में कार्य करेगा, जिसमें आज के मेंटी कल के मेंटर बन सकें।

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