
साल 2026 का पहला 'सुपरमून' आज, 14 फीसदी बड़ा दिखेगा चांद, क्या है Wolf से कनेक्शन ?
Supermoon: आज पौष पूर्णिमा का पावन दिन है, भक्तों ने सुबह-सुबह पवित्र नदियों में आस्था की डुबकी लगाई है तो वहीं आज की रात आकाश में साल 2026 का पहला 'सुपरमून' दिखाई पड़ेगा, ये चंद्रमा आम दिनों की तुलना में 30 फीसदी ज्यादा चमकीला और 14 फीसदी बड़ा नजर आएगा क्योंकि इसकी ये धरती के निकट होगा।
जनवरी महीने की पूर्णिमा को पारंपरिक रूप से Wolf Moon कहा जाता है। माना जाता है कि कड़ाके की ठंड के कारण पुराने समय में भेड़ियों के झुंड गांवों के पास आ जाते थे और उनकी आवाजें रात में दूर तक सुनाई देती थीं। इसी लोकमान्यता के चलते जनवरी की पूर्णिमा को यह नाम मिला है इसलिए आज का 'मून Wolf Supermoon' है।
Supermoon क्यों कहलाता है यह चंद्रमा?
जब पूर्णिमा के समय चंद्रमा अपनी कक्षा में पृथ्वी के सबसे नजदीकी बिंदु (Perigee) के आसपास होता है, तो उसे 'सुपरमून' कहा जाता है। इस स्थिति में चंद्रमा सामान्य पूर्णिमा की तुलना में लगभग 7-10% बड़ा और करीब 15% ज्यादा चमकीला दिखाई देता है।
क्यों है 3 जनवरी का Wolf Supermoon खास ?
यह 'सुपरमून' साल 2026 का पहला पूर्ण चंद्रमा है। खास बात यह है कि जनवरी की ठंडी रातों में आसमान अपेक्षाकृत साफ रहता है, जिससे चंद्रमा की चमक और भी स्पष्ट दिखाई देती है।
भारत में कब और कैसे देखें Wolf Supermoon ?
भारत में 'वुल्फ सुपरमून' आज शाम से रात भर देखा जा सकेगा, लेकिन सबसे सुंदर शाम 5:45 बजे (IST) देखा जाएगा, उस वक्त ये काफी स्पष्ट नजर आएगा। इसे देखने के लिए किसी विशेष उपकरण की जरूरत नहीं है, खुली आंखों से ही इसका आनंद लिया जा सकता है। हालांकि, दूरबीन या कैमरा इस्तेमाल करने से इसका अनुभव और भी शानदार हो सकता है।
खगोल प्रेमियों और आम लोगों के लिए क्यों है Supermoon खास ?
'वुल्फ सुपरमून' सिर्फ एक खगोलीय घटना नहीं, बल्कि प्रकृति से जुड़ने का एक दुर्लभ अवसर भी है। यह हमें चंद्रमा की कक्षा, पृथ्वी से उसके संबंध और ब्रह्मांड की विशालता का एहसास कराता है। यही वजह है कि खगोल प्रेमियों के साथ-साथ आम लोग भी इसे देखने के लिए उत्सुक रहते हैं।
हिंदू धर्म में Supermoon का महत्व
धर्म और आध्यात्म में 'सुपरमून' को सिर्फ एक खगोलीय घटना नहीं, बल्कि ऊर्जा, साधना और चेतना के विशेष समय के रूप में देखा जाता है। हिंदू धर्म में चंद्रमा को 'सोम देव' कहा गया है और उसे मन, भावनाओं और जल तत्व का स्वामी माना जाता है।
पूर्णिमा का दिन वैसे ही पूजा, व्रत और दान के लिए अत्यंत शुभ होता है, लेकिन जब पूर्णिमा 'सुपरमून' की होती है, तो इसे अधिक फलदायी माना जाता है। मान्यता है कि 'सुपरमून' की रात की गई साधना से मन की शांति, और सकारात्मक ऊर्जा में वृद्धि होती है।