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गांवों में नई खटास पैदा करेगी पंचायतों में आरक्षण की राजनीति

एक ही जनगणना पर तीसरी बार लागू होगा पंचायत आरक्षण

2021 की जनगणना न होने से उत्पन्न हुई स्थिति

2011 की जनगणना ही होगी आरक्षण का मुख्य आधार


लखनऊ। एसएनबी। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में यह पहली बार होगा जब आरक्षण व्यवस्था लागू होने के बाद पंचायतों का आरक्षण तीसरी बार एक ही जनगणना पर लागू होगा। इससे पहले एक जनगणना पर अधिकतम दो बार आरक्षण लागू किया गया था। आरक्षण को लेकर यह स्थिति वर्ष 2021 में जनगणना होने के कारण उत्पन्न हो रही है। ऐसे में वर्ष 2011 की पुरानी जनगणना को ही मुख्य आधार मानकर आरक्षण लागू किया जाएगा। ऐसे में तमाम पंचायतों में उन वर्गों के लोगों को भी आरक्षण का लाभ मिल सकता है जहां पर उनकी जनसंख्या काफी कम है।

पंचायतों में त्रिस्तरीय व्यवस्था लागू होने के साथ ही आरक्षण व्यवस्था भी लागू की गयी थी। इसके तहत पंचायतों के सभी पदों ग्राम प्रधान, ग्राम पंचायत सदस्य, क्षेत्र पंचायत प्रमुख, क्षेत्र पंचायत सदस्य, जिला पंचायत अध्यक्ष व जिला पंचायत सदस्य में सभी वर्गों को आरक्षण दिया जाता रहा है। इसमें पिछड़ी जाति को 27 प्रतिशत, अनुसूचित जाति को 21 प्रतिशत आरक्षण दिया जाता है। इसके साथ ही सभी वर्गों में आरक्षित पदों में 33 प्रतिशत आरक्षण महिलाओं को दिया जाता है। पंचायतों में आरक्षण की यह व्यवस्था 1995 से लागू हुई जो वर्ष 1991 की जनगणना के आधार पर लागू की गयी थी। 1991 की जनगणना पर ही वर्ष 2000 के पंचायत चुनाव का आरक्षण लागू किया गया।

इसके बाद वर्ष 2001 की जनगणना पर वर्ष 2005 व 2010 के पंचायत चुनाव में आरक्षण लागू किया गया, फिर वर्ष 2011 की जनगणना पर 2015 व 2021 के पंचायत चुनाव कराये गये। अब स्थिति ऐसी उत्पन्न हो गयी है कि वर्ष 2021 में केन्द्र सरकार से जनगणना ही नहीं करायी है। यदि 2021 में जनगणना करायी जाती तो वर्ष 2026 में होने वाले पंचायत चुनाव में इसके आधार पर आरक्षण लागू किया जाता लेकिन जनगणना न होने के कारण अब 2026 के पंचायत चुनाव में भी वर्ष 2011 की जनगणना पर ही आरक्षण लागू करना पड़ेगा। भले ही पंचायतों में किसी वर्ग की जनसंख्या घट-बढ़ गयी हो। वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर जब वर्ष 2015 में आरक्षण लागू किया गया था तब प्रदेश में 59182 ग्राम पंचायतों में प्रधान पद का चुनाव कराया गया था। इसी तरह ग्राम पंचायत सदस्य के 742269 पदों, क्षेत्र पंचायत प्रमुख के 821 पदों, क्षेत्र पंचायत सदस्य के 77576 पदों, जिला पंचायत अध्यक्ष के 75 व जिला पंचायत सदस्य के 3112 पदों के लिए चुनाव कराया गया था। इसके बाद वर्ष 2021 में भी वर्ष 2011 की जनगणना पर ही आरक्षण लागू किया गया। वर्ष 2021 में प्रदेश में 58189 ग्राम पंचायतों में प्रधान पदों पर चुनाव कराया गया था। इसी तरह ग्राम पंचायत सदस्य के 732643, क्षेत्र पंचायत सदस्य के 75845, क्षेत्र पंचायत अध्यक्ष के 826, जिला पंचायत अध्यक्ष के 75 व जिला पंचायत सदस्य के 3050 पदों के लिए चुनाव कराया गया था। अब 2026 के होने वाले पंचायत चुनाव में पंचायतीराज विभाग को आरक्षण लागू करने के लिए वर्ष 2011 की जनगणना का ही सहारा लेना पड़ेगा। इस वर्ष ग्राम प्रधान के 57694, ग्राम पंचायत सदस्य के 726141, क्षेत्र पंचायत अध्यक्ष के 826, क्षेत्र पंचायत सदस्य के 75355, जिला पंचायत अध्यक्ष के 75 व जिला पंचायत सदस्य के 3021 पदों के लिए चुनाव होना है।

आरक्षण लागू करने में यह व्यवस्था होती है कि सबसे पहले एसटी, फिर एससी, फिर पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षण लागू किया जाता है। इसमें यह भी वर्ष 2015 व 2021 के चुनाव में जो सीट किसी भी वर्ग के लिए आरक्षित की गयी थी उनको छोड़ते हुए शेष बची सीटों में उस वर्ग के लिए आरक्षण लागू किया जाएगा। उदाहरण के लिए यदि एससी का आरक्षण 21 प्रतिशत है तो दो चुनावों में 42 प्रतिशत सीटों पर एससी का आरक्षण लागू किया जा चुका है अब इसके बाद शेष बची 58 प्रतिशत सीटों में 21 प्रतिशत एससी के लिए आरक्षित की जाएंगी। ऐसे में तमाम ऐसी ग्राम पंचायतें व अन्य सीटें इस वर्ग के लिए आरक्षित होंगी जहां पर इनकी जनसंख्या काफी कम है। ऐसा ही आरक्षण अन्य वर्गों के लिए भी होगा।

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