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बेनीबाद में धूमधाम से मनी सावित्रीबाई फुले जयंती, शिक्षा व अंधविश्वास उन्मूलन का दिया गया संदेश

बेनीबाद (मुजफ्फरपुर)।
बेनीबाद थाना क्षेत्र अंतर्गत पुरानानकार उच्च विद्यालय परिसर, डॉक्टर हरिश्चंद्र सहनी चौक के समीप सावित्रीबाई फुले जयंती के अवसर पर भव्य समारोह का आयोजन किया गया। इस मौके पर दूर-दराज से बुद्धिजीवी, पत्रकार, समाजसेवी व ग्रामीण बड़ी संख्या में शामिल हुए। कार्यक्रम का उद्देश्य शिक्षा, सामाजिक जागरूकता और अंधविश्वास उन्मूलन को बढ़ावा देना रहा।
समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में प्रख्यात कठपुतली कलाकार सुनील कुमार, विशिष्ट अतिथि कृष्ण कुमार सत्यवादी तथा अति विशिष्ट अतिथि के रूप में कंचन माला उपस्थित रहीं। सभी अतिथियों ने शिक्षा जागरूकता अभियान समिति द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम की सराहना की और जुब्बा सहनी शोध सेवा संस्थान, मुजफ्फरपुर की पहल को समाजहित में बताया।
अपने संबोधन में अति विशिष्ट अतिथि कंचन माला ने कहा कि “विद्या से विनम्रता आती है और यही समाज को सही दिशा देती है।” उन्होंने सावित्रीबाई फुले के संघर्षपूर्ण जीवन से प्रेरणा लेने का आह्वान किया और बालिका शिक्षा को सामाजिक बदलाव की सबसे मजबूत कड़ी बताया। वहीं मुख्य अतिथि सुनील कुमार ने लोककला और नाटक के माध्यम से सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ जन-जागरण की आवश्यकता पर बल दिया।
कार्यक्रम की शुरुआत जयकरण कुमार द्वारा प्रस्तुत स्वागत गीत से हुई। इसके बाद सभी अतिथियों को शॉल देकर सम्मानित किया गया। अंधविश्वास उन्मूलन को लेकर नाटक मंडली की प्रस्तुति ने ग्रामीणों का भरपूर मनोरंजन किया और साथ ही समाज में व्याप्त रूढ़ियों पर सशक्त संदेश दिया, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा।
इस अवसर पर मुनाजिर हसन, रंजीत सिंह, माले नेता जितेंद्र यादव, सत्यनारायण कुमार, ब्रजकिशोर सहनी, अविनाश कुमार, प्रवीण कुमार सिंह, अंबेडकर विचारक विद्यानंद राम, पूर्व सरपंच मनोज राम सहित अनेक सामाजिक कार्यकर्ता मौजूद रहे। कार्यक्रम का सफल संचालन देवराज सर ने किया।
समारोह के समापन पर “रन फॉर ह्यूमैनिटी” को समर्थन देने के लिए अतिथियों व ग्रामीणों ने कुछ दूरी तक पैदल मार्च किया। इस दौरान रानी राय, साइकिल गर्ल शिवानी उर्फ ट्विंकल, कारी देवी समेत कई महिलाओं ने स्थानीय सामाजिक मुद्दों, शिक्षा और महिला सशक्तिकरण पर अपनी बात रखी। वहीं ग्रामीणों ने गुमशुदा रामबाबू मंडल के मामले को लेकर केंद्रीय मंत्री डॉ. राजभूषण की पत्नी कंचन माला का ध्यान आकृष्ट कराया और शीघ्र पहल की मांग की।
कुल मिलाकर सावित्रीबाई फुले जयंती समारोह शिक्षा, समानता और सामाजिक चेतना का सशक्त संदेश देकर संपन्न हुआ, जिसमें समाज के हर वर्ग की भागीदारी देखने को मिली।

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