सीईओ जिला परिषद झुंझुनूं ने उपेंद्र मीणा ग्राम विकास अधिकारी डुमोली कला को 16 सीसीए के अंतर्गत चार्जशीट की जारी, 15 दिन में माँगा जवाब
सामाजिक कार्यकर्ता अंकित कुमार शर्मा ने ग्राम पंचायत डुमोली कला में सूचना के अधिकार 2005 के अंतर्गत ग्राम पंचायत में हुए निर्माण कार्यों, पट्टो आदि से संबंधित रिकॉर्ड की प्रतिलिपियां ग्राम विकास अधिकारी व लोक सुचना अधिकारी ग्राम पंचायत डुमोली कला से मांगी गई, परंतु तत्कालीन ग्राम विकास अधिकारी उपेंद्र मीणा ने यह सूचना निर्धारित समयावधि में उपलब्ध नहीं करायी, प्रथम अपील की गई उसके उपरांत भी सूचना उपलब्ध नहीं करायी गई ,तत्पश्चात राज्य सूचना आयोग में अपील प्रस्तुत करने पर वर्तमान ग्राम विकास अधिकारी को 21 दिन में सूचना देने का निर्णय पारित किया गया, परंतु अभी भी सूचना उपलब्ध नहीं करवाई गई है , अंकित कुमार शर्मा ने ग्राम पंचायत में गंभीर अनियमिता ,भ्रष्टाचार को देखते हुए,मुख्यमंत्री कार्यालय में परिवाद दर्ज करवाया, परिवाद की जांच मुख्य कार्यकारी अधिकारी जिला परिषद झुंझुनूं के द्वारा पंचायत समिति में कार्यरत अरविंद गोंड व विशंभर दयाल जांगिड़ सहायक विकास अधिकारियों की टीम गठन कर करवाई गई, जांच रिपोर्ट में गंभीर अनियमिता, भ्रष्टाचार,गबन का उजागर होना पाया गया है, जिसके अंतर्गत मुख्य कार्यकारी अधिकारी जिला परिषद झुन्झनू कैलाश चंद्र यादव ने तत्कालीन ग्राम विकास अधिकारी उपेंद्र मीणा को राजस्थान सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण और अपील ) नियम 1958 के नियम 16 के अंतर्गत अनुशासनात्मक कार्यवाही करते हेतु, नोटिस जारी कर 15 दिवस में बिंदुवार जवाब तलब किया गया है ,मुख्य रूप से तत्कालीन ग्राम विकास अधिकारी उपेंद्र मीणा पर गंभीर आरोप लगाये गए हैं, जिनमें बताया गया है, कि:-
1 . ग्राम पंचायत के द्वारा जारी पटटो की रसीद 3 माह ,6 माह, 9 माह पुरानी है, इनके अभी तक पट्टे जारी नहीं किये, रसीद संख्या 9, 12, 13 दिनांक 6. 3 .25 के क्रम में ग्यारसी देवी पत्नि जगदीश प्रसाद, राजेश कुमार पुत्र रामपत व सुशीला पत्नि विक्रम सिंह के हैं ,उक्त नामो के पट्टा आवेदन ग्राम पंचायत बैठक के प्रस्ताव संख्या एक दिनांक 20.5. 25 में स्वीकार, प्रस्ताव संख्या एक दिनांक 20. 6 .25 से आक्षेप जारी करने की कार्यवाही ,प्रस्ताव संख्या एक दिनांक 7.7.25 से पट्टा जारी का निर्णय प्रस्ताव संख्या 2 दिनांक 21.7. 25 द्वारा उक्त पट्टा आवेदनों की गत कार्यवाही का अनुमोदन कर शुल्क जमा करवा कर पंचायती राज नियम 1996 के नियम 157(1) के अंतर्गत विनियमितीकरण कर पट्टा जारी का निर्णय लेने के पश्चात भी प्रस्ताव संख्या एक दिनांक 5.8.25 में पट्टा जारी सूची में उक्त व्यक्तियों के नाम शामिल नहीं किये गये ,जो जानबूझकर निर्धारित समयावधि में पट्टे जारी नहीं किये गये,जो गंभीर लापरवाही बरती गई है, इसके लिए तत्कालीन ग्राम विकास अधिकारी उपेंद्र मीणा को आरोपित किया गया है।
2 .ग्राम पंचायत डुमोली कला में ग्राम विकास अधिकारी के द्वारा ग्राम पंचायत में साफ सफाई बिना कराए ही राजकीय राशि का आहरण किया गया है , घर-घर कचरा संग्रहण कार्य पेटे बिना काम कराये मूल्यांकन 2.90 लाख किया गया ,निर्धारित रजिस्टर संधारण नहीं किया गया तथा मूल्यांकन हेतु निर्धारित प्रक्रिया लॉक बुक यदि निर्देशों की पालना नहीं कर गंभीर लापरवाही बढ़ती गई है ,जिससे उसे आरोपित किया गया है
3 .ग्राम पंचायत डुमोली कला में ग्राम विकास अधिकारी के द्वारा वर्ष 2024-25 में 51 बिलों के पेटे 421876 रुपये व वर्ष 2025-26 में 26 बिलों के पेटे 232777 रुपये राशि का सामान्य बिल वाउचर के पेटे भुगतान किया गया है, बिलों का समय पर रोकड़ बही में इंद्राज नहीं किया गया , जो गंभीर अनियमिता है, राशि वसूली योग्य है,ग्राम पंचायत में 1000 रुपये से अधिक राशि का नगद भुगतान कर गबन किया गया है, सामान्य वित्त एवं लेखा नियमों के विरुद्ध वित्त वर्ष 2024-25 में कुल 13 बिलों के पेटे 22060 रुपये, वित्त वर्ष 2025 -26 में 5 बिलों के पेटे 8060 रुपये नगद भुगतान किया गया, जो गबन की श्रेणी में है, रोकड़ बही में उपलब्ध बैलेंस व योजना मदों के बैलेंस में 1045429 रुपये का अंतर पाया गया है ,जो गंभीर अनिमियता की श्रेणी में है , बिल, वाउचर कार्यालय अध्यक्ष सरपंच के द्वारा सत्यापित नहीं करवाए गये , कार्यालय में साफ सफाई का दायित्व सुरक्षा गार्ड का है ,जबकि साफ सफाई के पेटे भुगतान किया गया है, जो अनियमितता की श्रेणी में वसुली योग्य है ,खेल मैदान की चार दीवारी के ऊपर जाल लगाने के लिए निर्धारित संविदाकार सुरेश कुमार कंट्रक्शन से सामग्री न खरीद कर पायल ब्रदर्स से खरीदी गई जिससे 174161 रुपये का नियम विरुद्ध भुगतान करने की लापरवाही बरती गई है, इसके लिए तत्कालीन ग्राम विकास अधिकारी उपेंद्र मीणा जिम्मेदार है।
4 . उपेंद्र मीणा ग्राम विकास अधिकारी को दिनांक 11.11.25 को एपीओ करने के पश्चात भी ग्राम विकास अधिकारी ने ग्राम पंचायत में नियमित विरुद्ध एक माह तक काम किया और दिनांक 15 .11. 25 को निर्माण कार्यों की स्वीकृतियां जारी कर लापरवाही बरती गई है।
उक्त आरोपो से ग्राम विकास अधिकारी पर बाहरी अनियमिता, भ्रष्टाचार एवं गबन की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता है। ग्रामीणों ने विस्तृत जांच करवाने की मांग की है।