logo
Select Language
Hindi
Bengali
Tamil
Telugu
Marathi
Gujarati
Kannada
Malayalam
Punjabi
Urdu
Oriya

यूपी बोर्ड के विद्यार्थियों में बढ़ती कैरियर-उदासीनता: कारण और चिंतन — वीरेंद्र सिंह


उत्तर प्रदेश के अधिकांश क्षेत्रों में यह एक गंभीर और चिंताजनक तथ्य बनता जा रहा है कि यू.पी. बोर्ड के हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट के विद्यार्थियों में अपने कैरियर को लेकर उदासीनता लगातार बढ़ रही है। यह स्थिति केवल सरकारी विद्यालयों तक सीमित नहीं है, बल्कि निजी विद्यालयों में भी कमोबेश दिखाई देती है। प्रश्न यह है कि इसके पीछे कारण क्या हैं—सरकारी नीतियाँ, परीक्षा प्रणाली, विद्यालयी वातावरण या सामाजिक सोच?

सबसे पहला कारण परीक्षा व मूल्यांकन प्रणाली की लचर स्थिति मानी जा सकती है। जब मेहनत और परिणाम के बीच स्पष्ट संबंध नहीं दिखता, तब विद्यार्थियों में परिश्रम के प्रति विश्वास कमजोर हो जाता है। कई बार बिना गहन अध्ययन के भी अंक प्राप्त हो जाते हैं, जिससे “पास होना ही पर्याप्त है” जैसी मानसिकता विकसित हो जाती है।

दूसरा बड़ा कारण है कैरियर मार्गदर्शन (Career Guidance) का अभाव। अधिकांश विद्यालयों में विद्यार्थियों को यह नहीं बताया जाता कि पढ़ाई के बाद उनके लिए कौन-कौन से विकल्प उपलब्ध हैं। परिणामस्वरूप छात्र पढ़ाई को केवल डिग्री प्राप्त करने का साधन मानने लगते हैं, न कि भविष्य निर्माण का माध्यम।

तीसरा कारण शिक्षा का रोजगार से कटाव है। जब विद्यार्थियों को यह महसूस होता है कि पढ़ाई के बावजूद नौकरी या स्वरोजगार की स्पष्ट संभावनाएँ नहीं हैं, तो उनका उत्साह धीरे-धीरे खत्म होने लगता है। इससे निराशा और उदासीनता जन्म लेती है।

इसके अतिरिक्त सामाजिक व पारिवारिक दबाव, मोबाइल-सोशल मीडिया की अत्यधिक निर्भरता, योग्य शिक्षकों की कमी और विद्यालयों में अनुशासन व प्रेरणादायक वातावरण का अभाव भी इस समस्या को और गहरा करता है।

समाधान के लिए आवश्यक है कि
परीक्षा एवं मूल्यांकन प्रणाली को गंभीर, पारदर्शी और गुणवत्ता-आधारित बनाया जाए,
विद्यालयों में नियमित कैरियर काउंसलिंग अनिवार्य हो,
शिक्षा को रोजगार और कौशल विकास से जोड़ा जाए,
तथा शिक्षक, अभिभावक और सरकार—तीनों मिलकर विद्यार्थियों के मन में लक्ष्य, आत्मविश्वास और दिशा का निर्माण करें।

यदि समय रहते इस ओर ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो यह उदासीनता आने वाले समय में समाज और राष्ट्र—दोनों के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकती है। 

26
779 views

Comment