logo
Select Language
Hindi
Bengali
Tamil
Telugu
Marathi
Gujarati
Kannada
Malayalam
Punjabi
Urdu
Oriya

आज के नव उदारीकरण दौर की साम्राज्यवादी कार्य-प्रणाली के अंतर्गत शिक्षा के व्यापारीकरण, निजीकरण के कारण सार्वजनिक शिक्षा पर बड़ा हमला है :- कृष्ण नैन

फतेहाबाद :- हरियाणा विद्यालय अध्यापक संघ संबंधित सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा एवं स्कूल टीचर फेडरेशन ऑफ इंडिया के आह्वान पर अलग अलग जिलों में "संगठन की जनवादी कार्यप्रणाली एवं अध्यापक आन्दोलन के परिपेक्ष्य" विषयों पर जिला कन्वेंशने की गई। इसी कड़ी फतेहाबाद जिले में जिला प्रधान राजपाल मिताथल की अध्यक्षता में कन्वेंशन आयोजित की गई। संचालन जिला सचिव देसराज माचरा ने किया। कन्वेंशन के मुख्यवक्ता सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा के महासचिव व हरियाणा विद्यालय अध्यापक संघ के उप महासचिव कृष्ण नैन, राज्य आडिटर सुरजीत दुसाद, सचिव पवन कुमार व हिसार के जिला प्रधान प्रमोद जांगड़ा उपस्थित हुए। कन्वेंशन को सम्बोधित करते हुए कृष्ण नैन ने बताया कि लाखों वर्षों के अनुभवों का स्वामी एक व्यक्ति या संस्था नहीं हो सकती। इस तरह शिक्षा के निजीकरण का कोई औचित्य ही नहीं बनता। शिक्षा महज किताबी ज्ञान नहीं है, बल्कि अच्छे इंसान बनाने और मिलजुल कर आगे बढ़ने का जरिया है। शिक्षा व्यक्ति का सर्वांगीण विकास करती है, लेकिन इसकी सार्थकता तब मानी जाती है जब उसके द्वारा प्राप्त डॉक्टर, इंजीनियर, तकनीशियन, अधिकारी, नेता आदि निःस्वार्थ भाव से समाज और प्रकृति के लिए काम करते हैं। आज के दौर में आम आदमियों को यह कहते सुना जाता है कि शिक्षा समाज को लूटने वाला तबका तैयार करती है। लोग ऐसी बातें अपने जीवन के कटु अनुभव के आधार पर कहते हैं। इन्हें नकारने की बजाय हमें शिक्षा व्यवस्था व उसकी कार्यप्रणाली पर विचार करना चाहिए।
शिक्षा से पूरे राष्ट्र और समाज को भी लाभ होता है। इसके द्वारा मानव श्रमशक्ति की क्षमता और दक्षता भी बढ़ती है, जिसका इस्तेमाल देश और समाज को आगे बढ़ाने के लिए किया जा सकता है। हमारे सामने यूरोप और अमेरिका के ही नहीं, बल्कि जापान, ताइवान, हांगकांग, दक्षिण कोरिया आदि के उदाहरण हैं, जो देश 40–45 वर्ष पहले हमारी तरह पिछड़े थे, वे शिक्षा, स्वास्थ्य और विकास के लिए शोध पर ज्यादा धन खर्च करके अग्रणी देशों की कतार में शामिल हो गए। भारत में 25 ℅ बच्चे स्कूल से बाहर हैं और 75 ℅ बच्चों के लिए उपयुक्त शिक्षा की व्यवस्था उपलब्ध नहीं है। ये शिक्षा पर सकल घरेलू उत्पाद का 6 प्रतिशत, स्वास्थ्य पर 6 प्रतिशत और विकास के लिए शोध पर 5 प्रतिशत से ज्यादा खर्च कर रहे हैं। हमारा यह खर्च क्रमशः 2, 1, और 1 प्रतिशत बना हुआ है। जापान सन 1945 में तबाह हो गया था, आज उसे विकसित देशों में गिना जाता है। चीन इससे दो साल बाद सन 1949 में आजाद हुआ। अग्रणी शोध और विकास करने में उसे अमेरिका के साथ गिना जाने लगा है।
राज्य आडिटर सुरजीत दुसाद ने कहा कि स्कूल टीचर्ज फेडरेशन ऑफ इंडिया के नेतृत्व में दिल्ली में अखिल भारतीय प्राथमिक शिक्षक संघ, हरियाणा विद्यालय अध्यापक संघ, राजस्थान शिक्षक संघ शेखावत, पंजाब शिक्षक संघ, केरला, बंगाल व अन्य राज्यों के संगठनों ने आह्वान किया कि 2009 से पहले लेगे अध्यापकों का सरकार द्वारा टीईटी परीक्षा लेने के विरोध में 7 जनवरी को जिला उपायुक्त कार्यालय पर विरोध प्रदर्शन करते हुए हरियाणा सरकार व केन्द्र सरकार को ज्ञापन सौंपा जाएगा तथा हरियाणा व केन्द्र सरकार 3 जनवरी को सावित्रीबाई फुले जयंती को शिक्षिका दिवस घोषित करने की मांग करता है । इस मौके पर जिला कोषाध्यक्ष जगजीत मुड़ाही, जिला उप प्रधान राजेंद्र कुमार,जिला सह सचिव देवीलाल, जिला कार्यालय सचिव राधेश्याम, भट्टूकलां ब्लॉक प्रधान सतपाल ढाका, फतेहाबाद ब्लॉक प्रधान हरपाल हुड्डा, सचिव मुरारी लाल, कोषाध्यक्ष राजेश गोठरा, उप प्रधान दलवंती नैन, सदस्य पूजा नागपाल, सदस्य राजेश कुमार डी पी ई, सदस्य योगेंद्र सिंह, सदस्य महेंद् सिंह, मैना देवी, कोमल, रतिया ब्लॉक कोषाध्यक्ष ओम प्रकाश, भूना प्रधान दलबीर सिंह नाथ, सचिव नरेश कुमार, सदस्य रोशन लाल, हनुमान रिवाड, विजय कुमार उपस्थित थे।

22
117 views

Comment