
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में सरुसजाई में होगा बागुरुम्बा का भव्य प्रदर्शन
असम की समृद्ध आदिवासी और लोक-सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय मंच पर गौरवान्वित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल के तहत 17 जनवरी को गुवाहाटी के सरुसजाई खेल परिसर में पारंपरिक बोडो लोकनृत्य ‘बागुरुम्बा’ का भव्य प्रदर्शन किया जाएगा। यह आयोजन माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की गरिमामयी उपस्थिति में संपन्न होगा, जिससे इस सांस्कृतिक कार्यक्रम का महत्व और भी बढ़ जाता है। बिहु बिनंदिया और झुमुईर बिनंदिनी जैसे सफल और भव्य सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के बाद, अब बोडो समुदाय की सांस्कृतिक पहचान माने जाने वाले बागुरुम्बा नृत्य को राष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत किया जा रहा है। बागुरुम्बा को उसकी कोमल, लयबद्ध और प्रकृति से जुड़ी मुद्राओं के कारण “तितली नृत्य” भी कहा जाता है, जो बोडो समाज की आध्यात्मिकता, सौंदर्यबोध और प्रकृति के साथ सामंजस्य को दर्शाता है। इस ऐतिहासिक आयोजन में असम के विभिन्न हिस्सों से 10,000 से अधिक कलाकारों के एक साथ मंच पर उतरने की संभावना है, जिससे यह अब तक का सबसे बड़ा बागुरुम्बा सामूहिक प्रदर्शन बन सकता है। इतनी बड़ी संख्या में कलाकारों की सहभागिता न केवल सांस्कृतिक एकता का प्रतीक होगी, बल्कि यह असम की विविध जनजातीय परंपराओं को एक साझा मंच पर प्रस्तुत करने का भी सशक्त संदेश देगी। आयोजन की तैयारी को लेकर व्यापक और सुव्यवस्थित योजना बनाई गई है। 4 जनवरी से मास्टर ट्रेनरों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा, ताकि नृत्य की मुद्राओं, तालमेल, अनुशासन और दृश्यात्मक समन्वय में किसी भी प्रकार की कमी न रहे। प्रशिक्षण का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि यह प्रस्तुति अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप एक भव्य दृश्य अनुभव के रूप में उभरे। सरुसजाई में होने वाला यह आयोजन असम सरकार के उस प्रयास को भी दर्शाता है, जिसके तहत राज्य की स्वदेशी परंपराओं को संरक्षित करने के साथ-साथ उन्हें राष्ट्रीय और वैश्विक मंच पर पहचान दिलाई जा रही है। यह कार्यक्रम न केवल बोडो समुदाय की सांस्कृतिक आत्मा को उजागर करेगा, बल्कि असम की सांस्कृतिक समावेशिता और विविधता को भी सशक्त रूप से प्रस्तुत करेगा। सांस्कृतिक विशेषज्ञों और सामाजिक संगठनों का मानना है कि यह आयोजन असम के सांस्कृतिक इतिहास में एक यादगार क्षण साबित होगा, जहां परंपरा, युवा शक्ति और राष्ट्रीय गौरव एक ही मंच पर एकजुट दिखाई देंगे। सरुसजाई में बागुरुम्बा का यह महाप्रदर्शन आने वाले वर्षों तक असम की सांस्कृतिक पहचान का एक ऐतिहासिक प्रतीक बन सकता है।