सवाल सीधा है—
जिस इतिहास को गाली दी जा रही है,
उसी इतिहास से सरकार सैकड़ों करोड़ कमा रही है।
तरफ़ ताजमहल को
“सफेद कब्रिस्तान” कहने वाले स्वघोषित कवि और नेता हैं,
और दूसरी तरफ़ सच्चाई ये है👇
📌 नए साल के पहले ही दिन ताजमहल में 65,000 से ज़्यादा पर्यटक पहुँचे।
📌 संसद में 3 अप्रैल को पेश सरकारी आंकड़ों के मुताबिक
2019–20 से 2023–24 के बीच सिर्फ़ 5 मुगलकालीन इमारतों से सरकार ने
₹548 करोड़ से ज़्यादा की कमाई की।
ये 5 सबसे ज़्यादा देखे जाने वाले स्मारक हैं: ▪️ ताजमहल – आगरा
▪️ कुतुब मीनार – दिल्ली
▪️ लाल किला – दिल्ली
▪️ आगरा किला
▪️ रबिया दुरानी का मकबरा – औरंगाबाद
❓ सवाल सीधा है—
जिस इतिहास को गाली दी जा रही है,
उसी इतिहास से सरकार सैकड़ों करोड़ कमा रही है।
इतिहास को नफ़रत से नहीं,
सच और समझ से पढ़ा जाता है।