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भगवान बुद्ध के 16 अर्हतों की परंपरा को शोभायात्रा ने किया जीवंत

बोधगया में विश्व शांति, सद्भाव और समस्त जीवों के कल्याण की कामना के साथ चल रहे 40वां काग्यू मोनलम पूजा चल रहा है। आयोजन के छठे दिन गुरुवार को मोनलम पवेलियन परिसर से 16 अर्हतों की भव्य शोभायात्रा निकाली गयी। भगवान बुद्ध द्वारा चुने गए यह 16 अर्हत वह महान अनुयायी माने जाते हैं। जिन्हें बुद्ध ने यह दायित्व सौंपा था कि वे संसार में रहकर धर्म की रक्षा करते रहें, जब तक कि जीव बुद्ध की शिक्षाओं से लाभान्वित होने में सक्षम हों। बुद्ध के परिनिर्वाण के समय इन अर्हतों ने यह संकल्प लिया था कि अगले बुद्ध मैत्रेय के प्रकट होने तक वे धर्म परंपरा को सुरक्षित रखेंगे। शोभायात्रा के दौरान अर्हतों के रूप में शामिल भिक्षुओं ने पारंपरिक वेशभूषा और विशेष मुखौटा पहनकर आकर्षक प्रस्तुति दी। इनकी पोशाक और शैली चीनी बौद्ध परंपरा को दर्शाती है, जो 10वीं शताब्दी में बौद्ध पुनर्जागरण के दौर में तिब्बत पहुंची थी। प्रत्येक अर्हत अपनी विशेष वस्तु और रूप से पहचाने जाते हैं। अर्हतों में अभेद, गोपक, नागसेन, महा पंथक, पिन्दोल भारद्वाज, चूड़ पंथक, राहुल, कनक, भद्र, वजीरपुत्र, कालिका, वनवासिन, अजित और अंगाज शामिल है। अनुष्ठान स्थल पर बड़ी संख्या में देश-विदेश से आए बौद्ध अनुयायियों ने इस आध्यात्मिक शोभायात्रा का दर्शन किया और विश्व शांति की कामना के साथ प्रार्थना की। आयोजकों ने बताया कि यह परंपरा करुणा, नैतिकता और धर्म के संरक्षण का प्रतीक है।

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