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BREAKING NIGHT NEWS | दिल्ली गैंग वॉर से दहला दक्षिणी इलाका दिल्ली की रात गोलियों की गूंज से कांप उठी। राजधानी के दक्षिणी छोर पर, दिल्ली–गुड़गांव सीमा

🩸 72 गोलियां, 2 घंटे का पोस्टमार्टम
30 नवंबर की ठिठुरती सुबह। हल्का कोहरा।
52 वर्षीय डेयरी मालिक रतन लोहिया काम पर निकले—और रास्ते में मौत ने घेर लिया।
पुलिस के मुताबिक, निसान मैग्नाइट में सवार पांच हमलावरों ने उन्हें रोका और अंधाधुंध फायरिंग कर दी।
रतन ने बुलेटप्रूफ जैकेट पहन रखी थी, लेकिन हमलावरों की दरिंदगी के आगे वह भी बेबस रही।
कुल 72 गोलियां चलीं, जिनमें से 69 गोलियां शरीर, कपड़ों और जैकेट में मिलीं।
सफदरजंग अस्पताल में पोस्टमार्टम से पहले दो डॉक्टरों को गोलियां निकालने में करीब दो घंटे लगे।
🔫 पहले अरुण, फिर रतन—बदले की खूनी चेन
जांच में सामने आया कि यह कत्ल कोई इत्तेफाक नहीं।
छह महीने पहले, छतरपुर मेट्रो स्टेशन के पास रियल एस्टेट कारोबारी अरुण लोहिया की दिनदहाड़े हत्या हुई थी।
साकेत कोर्ट से लौटते वक्त मारुति ऑल्टो में सवार हमलावरों ने उनकी कार रोकी—और 10 गोलियां दाग दीं। मौके पर ही मौत।
💸 पैसे का विवाद, पंचायत नाकाम, खून बहा
दोनों हत्याओं की जड़ में 25 लाख रुपये का निवेश विवाद।
कोविड लॉकडाउन में नौकरी छूटने के बाद रतन के बेटे दीपक ने अरुण के कारोबार में रकम लगाई थी।
पैसा वापस न मिलने पर तनाव बढ़ा।
अप्रैल 2024 में दीपक के साथ मारपीट—अरुण पर हत्या के प्रयास का केस।
पंचायतें हुईं, समझौते नाकाम रहे—और फिर बदले की आग भड़क उठी।
🚔 गिरफ्तारियां, लेकिन डर कायम
अरुण की हत्या में दीपक लोहिया समेत दो कथित शूटर योगेश और अजय गिरफ्तार।
दीपक को पनाह देने के आरोप में परिवार के सदस्यों सहित एक दर्जन से ज्यादा लोगों पर केस।
अब रतन की हत्या ने इलाके में दहशत फैला दी है।
🧠 BOTTOM LINE
यह सिर्फ दो हत्याएं नहीं—
यह पैसे, पावर और बदले का वह चक्र है, जिसमें कानून से पहले गन बोलती है।
सवाल सीधा है: क्या अगला नाम रोका जा सकेगा?
संवाददाता DEEPAK SHARMA

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