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सामुदायिक विकास कार्यक्रम के अंतर्गत चार दिवसीय ‘प्रशिक्षकों का प्रशिक्षण’ सम्पन्न।

प्रेस – राम कुमार टेकाम
सोनभद्र उत्तर प्रदेश

बनवासी सेवा आश्रम गोविंदपुर म्योरपुर सोनभद्र ने सामुदायिक विकास कार्यक्रम के अंतर्गत 29 दिसंबर 2025 से 1 जनवरी 2026 तक चार दिवसीय “प्रशिक्षकों का प्रशिक्षण (Training of Trainers – ToT)” कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। यह प्रशिक्षण 37 ग्राम पंचायतों में कार्यरत 10 क्लस्टर कोऑर्डिनेटर्स, 28 पीआरपी (प्रेरक संसाधन व्यक्ति) तथा केंद्रीय टीम के सदस्यों के लिए आयोजित किया गया।
प्रशिक्षण कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य ग्राम स्तर पर आजीविका की संभावनाओं को मजबूत करने तथा सामुदायिक विकास से जुड़ी योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए एक ठोस कार्ययोजना तैयार करना रहा। चारों दिनों में सहभागियों के साथ आजीविका आधारित गतिविधियों, संसाधनों के उपयोग और स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप योजनाओं पर विस्तृत चर्चा की गई।
🎯 आजीविका केंद्रित कार्ययोजना पर विशेष मंथन
कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों ने समूह चर्चा, प्रस्तुति और अनुभव साझा करने के माध्यम से यह समझने का प्रयास किया कि किस प्रकार ग्राम पंचायत स्तर पर स्थायी आजीविका मॉडल विकसित किए जा सकते हैं। प्रशिक्षण ने प्रतिभागियों की नेतृत्व क्षमता और कार्य निष्पादन कौशल को भी सुदृढ़ किया।
इस चार दिवसीय प्रशिक्षण के मुख्य संदर्भ व्यक्ति श्री संदीप आवल (मैनेजर – लाईवलीहुड, मिशन समृद्धि) रहे। उन्होंने आजीविका विकास, सामुदायिक भागीदारी और दीर्घकालिक प्रभाव वाले कार्यक्रमों पर मार्गदर्शन प्रदान किया।
📘 सर्वोदय डायरी 2026 और गांधी विचारों का समावेश
प्रशिक्षण के दौरान सर्वोदय डायरी 2026 को आश्रम कार्यकर्ताओं के बीच वितरित किया गया। इस अवसर पर नियमित डायरी लेखन को महात्मा गांधी के विचारों से जोड़ते हुए इसके महत्व पर विशेष चर्चा की गई।
गांधीजी डायरी लेखन को आत्मविकास और आत्मशुद्धि का सशक्त माध्यम मानते थे—
1. आत्मचिंतन का माध्यम
डायरी लेखन व्यक्ति को अपने विचारों, भावनाओं और कर्मों का ईमानदार मूल्यांकन करने का अवसर देता है।
2. सत्य के प्रति प्रतिबद्धता
गांधीजी के अनुसार डायरी में लिखा गया प्रत्येक शब्द सत्य के निकट होना चाहिए, जिससे नैतिक जीवन की प्रेरणा मिलती है।
3. आत्मअनुशासन और संयम
नियमित लेखन से जीवन में अनुशासन आता है। गांधीजी स्वयं अपने अनुभवों को लिखकर आत्मसंयम का अभ्यास करते थे।
4. विचारों की स्पष्टता
डायरी लेखन से मानसिक भ्रम कम होता है और निर्णय क्षमता सशक्त होती है।
5. निरंतर आत्मसुधार
बीते कार्यों को लिखकर देखने से कमजोरियों की पहचान होती है, जो आत्मसुधार का प्रथम चरण है।
✨ गांधीजी के विचारों से प्रेरित पंक्ति
“अपने जीवन को समझने और सुधारने का सबसे सरल उपाय है—प्रतिदिन अपने कर्मों का लेखा-जोखा रखना।”
🌱 प्रतिभागियों का संकल्प
प्रशिक्षण में शामिल आश्रम कार्यकर्ताओं और प्रशिक्षकों ने संकल्प लिया कि वे सर्वोदय डायरी 2026 को आत्मचिंतन, कार्य मूल्यांकन और सामुदायिक सेवा के प्रभावी उपकरण के रूप में उपयोग करेंगे। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम आने वाले समय में ग्राम पंचायत स्तर पर सामाजिक एवं आर्थिक परिवर्तन की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

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