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रीवा सेमरिया नगर परिषद उपचुनाव में कांग्रेस की जीत

सेमरिया नगर परिषद में हुए उपचुनाव ने एक बार फिर स्थानीय राजनीति की दिशा और दशा स्पष्ट कर दी है। नगर परिषद अध्यक्ष पद पर कांग्रेस की जीत के साथ पदमा रोहिणी कुशवाहा अध्यक्ष निर्वाचित हुईं और कांग्रेस ने कुर्सी पर कब्जा जमाया।

इस चुनाव परिणाम ने एक बात बिल्कुल साफ कर दी है—सेमरिया में अभय मिश्रा को पराजित करना आसान नहीं है बल्कि इससे पूर्व विधायक केपी त्रिपाठी की स्थानीय पकड़ भी जगजाहिर हो रही है ।
स्थानीय जनाधार, संगठनात्मक पकड़ और क्षेत्र में प्रभाव की दृष्टि से अभय मिश्रा एक बार फिर मजबूत स्तंभ बनकर उभरे हैं।

गौर करने वाली बात यह भी है कि कुछ ही दिन पहले देश के गृह मंत्री और भाजपा के कद्दावर नेता अमित शाह का सेमरिया दौरा हुआ था। भले ही यह दौरा औपचारिक रूप से चुनावी न बताया गया हो, लेकिन कांग्रेसी इसे सीधे तौर पर नगर परिषद की सत्ता से जोड़कर देख रहे थे।

यदि इस तर्क को दरकिनार भी कर दिया जाए, तब भी यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि अमित शाह जैसे चुनावी रणनीतिकार की मौजूदगी का कोई सकारात्मक असर भाजपा को क्यों नहीं मिला?

प्रदेश और देश की सत्ता में काबिज भाजपा, इतने बड़े बड़े नेताओं के दौरे के बावजूद सेमरिया में अध्यक्ष पद नहीं जीत पाई—यह निश्चित ही पार्टी के लिए आत्ममंथन का विषय है।

जिस अमित शाह के चुनावी मैनेजमेंट की गूंज देश ही नहीं, विदेशों तक सुनाई देती है, वही रणनीति सेमरिया में अभय मिश्रा के सामने प्रभावी साबित नहीं हो सकी।

पूर्व विधायक के समर्थक लगातार अभय मिश्रा के कार्यों को अपने विधायक कार्य बताकर सोशल मीडिया में भी भ्रामक खबरें फैलाते रहें लेकिन कोई हथकंडा स्थानीय चुनाव में काम न आना साफ बताता है कि स्थानीय लोगों की पसंद आज भी अभय मिश्रा हैं ।

हालांकि राजनीतिक गलियारों में एक चर्चा यह भी है की इस उप चुनाव में हर का एक कारण भाजपा संगठन का अंदरूनी मामला भी माना जा सकता है ऐसा इसलिए क्योंकि सेमरिया की जनता के बीच संगठन का काम हो या जनता की समस्याओं का निराकरण हर कार्यों में अपनी एक अलग पहचान बनाने वाले युवा नेतृत्व Sanjay Diwedi Semariya जिनका सेमरिया की युवाओं में एक अलग पुकार मानी जाती है ऐसे युवा नेतृत्व को भाजपा जिला संगठन ने सिमरिया के चुनाव में जगह न देकर अपने हार का रास्ता स्वयं ही खोल दिया था और यह भी एक मजबूत वजह होगी भाजपा संगठन को इस छोटे से चुनाव में हार का सामना करना पड़ रहा है।

यह उपचुनाव का हार सिर्फ चुनावी हार नहीं बल्कि रीवा सांसद के गृह ग्राम की हार भी है पूरे भाजपा संगठन का हार भी है।

इससे यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि सेमरिया की राजनीति में अभय मिश्रा का कद और पकड़ अब भी अडिग है।

कुल मिलाकर, यह उपचुनाव सिर्फ एक अध्यक्ष पद की जीत-हार नहीं, बल्कि सेमरिया की ज़मीनी राजनीति का आईना है—जहां बड़े नामों से ज्यादा स्थानीय नेतृत्व और जनता का भरोसा निर्णायक साबित हुआ।

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