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दिल्ली तक चिख इंदौर में गंदा पानी पीने की घटना पर बयान से विवाद

इंदौर मध्यप्रदेश। इंदौर मध्यप्रदेश में गंदा पानी पीने से लोगों के बीमार होने की घटना को लेकर सियासी बयानबाज़ी तेज हो गई है। इस मामले में भाजपा नेता कैलाश विजयवर्गीय द्वारा दिए गए “घंटा” वाले बयान पर तीखी प्रतिक्रियाएँ सामने आ रही हैं। आलोचकों का कहना है कि इस तरह के बयान न केवल प्रशासनिक जवाबदेही से ध्यान हटाते हैं, बल्कि आम जनता की पीड़ा को भी हल्के में लेते हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि लंबे समय से दूषित पानी की आपूर्ति की शिकायतें की जा रही थीं, लेकिन संबंधित विभागों ने समय रहते कोई ठोस कदम नहीं उठाया। घटना के बाद भी जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई के बजाय बयानबाज़ी तक सीमित रहना सरकार और प्रशासन की संवेदनशीलता पर सवाल खड़े करता है।
विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो, दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए और प्रभावित लोगों को तत्काल राहत दी जाए। उनका कहना है कि सत्ता में बैठे लोगों द्वारा इस तरह की भाषा का प्रयोग जनता की तकलीफों का मज़ाक उड़ाने जैसा है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जब जनता अपनी समस्याओं को लेकर आवाज़ उठाती है, तब केवल बयान नहीं बल्कि ठोस समाधान चाहिए। उनका मानना है कि यदि ऐसे मामलों में जवाबदेही तय नहीं की गई, तो जनता का भरोसा व्यवस्था से उठता चला जाएगा।
फिलहाल प्रशासन की ओर से जांच के निर्देश देने की बात कही जा रही है, लेकिन ज़मीनी स्तर पर हालात सामान्य होने और सुरक्षित पेयजल की उपलब्धता को लेकर लोग अब भी चिंतित हैं।

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