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शीर्षक : "नव-वर्ष — नव-संकल्प का उजास"

शीर्षक : नव-वर्ष — नव-संकल्प का उजास
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छंद – १
नव-वर्ष की पहली किरण, आशा का दीप जलाती है,
बीते कल की धूल हटाकर, नई राह दिखलाती है।
थके मनों में प्राण फूंके, विश्वास नया भरती है,
सूनी आंखों में सपनों की, चंचल धूप उतरती है।
हर बीते पल का लेखा-जोखा, मौन खड़ा मुस्काता है,
गलतियों से सीख बटोरकर, भविष्य मार्ग सजाता है।
टूटे हौसलों के कंधों पर, धैर्य हाथ रख जाता है,
कहता— “चल, मैं साथ हूं,” हर डर पीछे रह जाता है।
नव-वर्ष नहीं बस तारीख, यह चेतना का पर्व बने,
हर मन में मानवता जागे, हर घर में सद्भाव सजे।
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छंद – २
नव-वर्ष कहे— कटुता छोड़ो, प्रेम का दीप जलाओ,
मन-मंदिर की जमीं धूल को, क्षमा-जल से नहलाओ।
वाणी में मधु, दृष्टि में करुणा, कर्मों में उजियारा हो,
मेहनत का हर बीज बने जब, तब जीवन सिंधु न्यारा हो।
नव संकल्प की डोर पकड़कर, सत्य पथ पर चलना है,
लोभ-लहरें चाहे जितनी हों, संयम को ही थामना है।
जो हारा है उसे उठाना, जो रूठा है उसे मनाना,
नव-वर्ष तभी सार्थक होगा, जब हम सीखें मानव बनाना।
हर हाथ बने सहारा, हर दिल बने इक आंगन,
जहां न कोई पराया ठहरे, बस अपनापन हो प्रांगण।
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छंद – ३
नव-वर्ष पुकारे— मत गिन केवल, दौलत, पद, पहचान,
सबसे बड़ी कमाई होती, शांत हृदय की मुस्कान।
जो मिला उसे साझा करना, यही समृद्धि की रेखा है,
जिस घर में करुणा बसती है, वही सच्चा लेखा है।
कांटों से भरी राहों में भी, फूलों की खुशबू बोना,
अंधियारे के बीच खड़ा हो, दीपक बनकर रोना-हंसना।
समय बड़ा शिक्षक होता है, यह भी पाठ पढ़ाता है,
जो झुकना सीख गया जग में, वही ऊंचा उठ जाता है।
नव-वर्ष बने अभ्यास हमारा, भीतर का युद्ध जीतें,
क्रोध, अहं, ईर्ष्या त्यागें, प्रेम-सत्य को सींचें।
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छंद – ४
नव-वर्ष नयी प्रतिज्ञा बनकर, आत्मा को झकझोरे,
कहता— “कल को मत टालो, आज से ही सब जोड़े।”
जो सपना मन में पलता है, उसे कर्मों में ढालो,
हर दिन को पर्व बना डालो, हर पल को दीप उजालो।
धरती, जल, वन, जीव सभी से, रिश्ता फिर से साधो,
स्वार्थ की संकरी गलियों से, बाहर आकर साधो।
नव-वर्ष तभी मंगलमय हो, जब पीड़ा कम हो जाए,
एक भी आंख अगर रोती हो, हमारी नींद उड़ जाए।
आओ मिलकर व्रत यह लें हम— मानवता सर्वोपरि हो,
नव-वर्ष नहीं, नव-युग आए, ऐसा हर पल संकल्प हो।
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डिस्क्लेमर:-
यह रचना कवि 🖌️🖌️ सुरेश पटेल सुरेश की मौलिक छंद-शैली कृति है; इसके भाव, विचार एवं प्रस्तुति पूर्णत: लेखक के स्वत्वाधिकार में सुरक्षित हैं।
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