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अंकिता भंडारी केस की आड़ में ब्लैकमेलिंग का शक! समाजसेवी अंकित बड़थ्वाल ने खोला मोर्चा, शासन से की साक्ष्य ज़ब्त करने की मांग

उत्तराखंड: प्रदेश को झकझोर देने वाले अंकिता भंडारी प्रकरण में एक नया मोड़ सामने आया है। जहाँ उत्तराखंड की जनता न्याय की उम्मीद लगाए बैठी है, वहीं सोशल मीडिया पर कुछ लोगों द्वारा इस संवेदनशील मामले का उपयोग निजी स्वार्थ और सनसनी फैलाने के लिए किया जा रहा है।

प्रमुख समाजसेवी अंकित बड़थ्वाल ने इस मामले में कड़ा संज्ञान लेते हुए प्रदेश के उच्चाधिकारियों को पत्र भेजा है। बड़थ्वाल ने 'उर्मिला सोनकर' नामक महिला पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उक्त महिला द्वारा सोशल मीडिया लाइव के माध्यम से न केवल अभद्र भाषा का प्रयोग किया जा रहा है, बल्कि अंकिता केस से जुड़े कथित 'ऑडियो साक्ष्यों' के नाम पर ब्लैकमेलिंग का खेल खेला जा रहा है।

अंकित बड़थ्वाल के तीखे सवाल:

"यदि महिला के पास हत्यारों के ऑडियो हैं, तो वे अब तक कोर्ट या SIT के पास क्यों नहीं पहुँचे?"

"क्या साक्ष्यों को दबाकर रखना और उनके जरिए धमकियां देना न्याय प्रक्रिया के साथ खिलवाड़ नहीं है?"

"सोशल मीडिया पर गालियां देकर उत्तराखंड की देवतुल्य संस्कृति को कलंकित करने की इजाजत किसने दी?"

अंकित बड़थ्वाल ने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन और साइबर सेल को भेजी शिकायत में स्पष्ट किया है कि यदि प्रशासन ने जल्द ही महिला के मोबाइल फोन की फोरेंसिक जांच नहीं की और साक्ष्य ज़ब्त नहीं किए, तो वह इस लड़ाई को सड़क से लेकर अदालत तक ले जाएंगे।

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