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झारखंड में पेसा (PESA - Panchayats Extension to Scheduled Areas) नियमावली को आखिरकार मंजूरी मिल गई है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में 23 दिस

झारखंड में पेसा (PESA - Panchayats Extension to Scheduled Areas) नियमावली को आखिरकार मंजूरी मिल गई है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में 23 दिसंबर 2025 को हुई कैबिनेट बैठक में इस लंबे समय से प्रतीक्षित नियमावली के प्रारूप को स्वीकृति दी गई।
​यह कानून राज्य के 15 जिलों के अनुसूचित क्षेत्रों (Scheduled Areas) में लागू होगा। इसका मुख्य उद्देश्य आदिवासी समुदायों को जल, जंगल और जमीन पर उनके पारंपरिक अधिकार वापस देना और ग्राम सभाओं को सशक्त बनाना है।
​झारखंड पेसा नियमावली की प्रमुख विशेषताएँ :
​कैबिनेट के निर्णय के अनुसार, इस नियमावली में ग्राम सभाओं को निम्नलिखित अधिकार दिए गए हैं:
​1. संसाधनों पर अधिकार
​लघु खनिज (Minor Minerals): बालू घाटों का संचालन और लघु खनिजों (जैसे पत्थर, गिट्टी आदि) से मिलने वाली रॉयल्टी अब ग्राम सभा के कोष में जमा होगी।
​जल निकाय: गाँव की सीमा के भीतर आने वाले तालाबों और जलाशयों के प्रबंधन का अधिकार ग्राम सभा के पास होगा।
​लघु वनोपज: जंगल से मिलने वाले उत्पादों (जैसे महुआ, इमली, पत्ता आदि) के प्रबंधन और मालिकाना हक पर ग्राम सभा का नियंत्रण होगा।
​2. भूमि अधिग्रहण और सुरक्षा
​अनिवार्य सहमति: अब अनुसूचित क्षेत्रों में किसी भी विकास परियोजना या भूमि अधिग्रहण के लिए ग्राम सभा की पूर्व सहमति लेना अनिवार्य होगा।
​अवैध हस्तांतरण: आदिवासियों की जमीन के अवैध हस्तांतरण को रोकने और हस्तांतरित जमीन को वापस दिलाने की शक्ति भी ग्राम सभा को दी गई है।
​3. सामाजिक और प्रशासनिक अधिकार
​पुलिस की कार्रवाई: नई नियमावली के तहत, पुलिस किसी की गिरफ्तारी करने से पहले ग्राम सभा को सूचित करेगी। ग्राम सभा 48 घंटे के भीतर गिरफ्तारी के कारणों की जानकारी मांग सकती है।
​पारंपरिक नेतृत्व: ग्राम सभा की बैठकों की अध्यक्षता मानकी-मुंडा या डोकलो-सोहोर जैसे पारंपरिक ग्राम प्रधान ही करेंगे।
​नशाखोरी पर नियंत्रण: ग्राम सभा अपने क्षेत्र में शराब और अन्य नशीले पदार्थों की बिक्री और उपभोग को विनियमित या प्रतिबंधित कर सकेगी।
​4. ग्राम सभा का गठन और कोरम
​महिलाओं की भागीदारी: ग्राम सभा की बैठकों के लिए 1/3 कोरम अनिवार्य है, जिसमें महिलाओं की 1/3 उपस्थिति होना आवश्यक है।
​सचिवालय: पंचायत सचिव अब 'ग्राम सभा सचिव' के रूप में भी काम करेंगे।
​किन जिलों पर होगा असर?
​झारखंड के 15 जिले जो पूर्ण या आंशिक रूप से पांचवीं अनुसूची के अंतर्गत आते हैं, वहां यह कानून लागू होगा। इनमें मुख्य रूप से खूंटी, गुमला, सिमडेगा, लोहरदगा, पश्चिम सिंहभूम, पूर्वी सिंहभूम, सरायकेला-खरसावां, रांची, दुमका, जामताड़ा, पाकुड़ और साहिबगंज शामिल हैं

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