
सर्द धूप में सपनों की चौपाल: रक्सा–कोलमी में शिक्षा, संवाद और संवेदना का संगम
अनूपपुर।
रक्सा–कोलमी गांव की सर्द धूप उस दिन कुछ खास थी। सरकारी स्कूल का आंगन, पेड़ों की छांव और रंगीन दीवारें—सब मिलकर कक्का की चौपाल के लिए जैसे सज गई थीं। यह सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि वह मंच था जहां शिक्षा ने संवाद की शक्ल ली और संवेदना ने भविष्य से हाथ मिलाया।
सीएसआर मद से मिले नए बेंच–डेस्क बच्चों की कतारों में सजे थे। नीली वर्दी में बैठे बच्चे आंखों में उम्मीद की चमक लिए सामने देख रहे थे। कार्यक्रम की शुरुआत बच्चों के परिचय से हुई—मासूम आवाज़ों में नाम, कक्षा और सपने। कोई डॉक्टर बनना चाहता है, कोई शिक्षक—हर सपना गांव की मिट्टी से निकलकर आसमान छूने की जिद लिए था।
न्यू जोन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और टोरंट पावर लिमिटेड के अधिकारियों ने बच्चों से सीधा संवाद किया। पानी की उपयोगिता, पढ़ाई-लिखाई की अहमियत और सांस्कृतिक गतिविधियों पर बच्चों के विचार सुने गए। तालियों और मुस्कानों के बीच यह एहसास और गहरा हुआ कि संसाधन मिलें तो प्रतिभा खुद अपनी राह बना लेती है।
कार्यक्रम में सुशील पाण्डेय (वाइस प्रेसिडेंट) ने अपने बचपन की स्मृतियां साझा कीं—
“हाफ पैंट, लकड़ी की पट्टी, छूही और लकड़ी की कलम… साधन कम थे, सीखने की चाह बहुत।”
उनकी बातों में बच्चों के लिए साफ संदेश था—मेहनत और अनुशासन से सपने सच होते हैं।
गांव के बुजुर्ग चक्रधर मिश्रा ने अनुभव साझा करते हुए कहा—
“पांचवीं तक गांव में पढ़े, फिर कोतमा। खेती का काम भी साथ चलता था। जूते नहीं थे, पर खुशी थी।”
उनकी आंखों में संतोष झलक रहा था कि आज के बच्चों के पास पढ़ाई के बेहतर अवसर हैं।
वहीं धीरज सिंह (उप महाप्रबंधक) और ओम प्रकाश नैनीवाल (CSR हेड) ने भरोसा दिलाया कि आवश्यक सुविधाएं आगे भी उपलब्ध कराई जाएंगी। उन्होंने कहा—
“सामुदायिक विकास हमारा निरंतर संकल्प है।”
बच्चों की हंसी, सवाल-जवाब की गूंज, शिक्षकों की सजग निगाहें और रंगीन स्कूल भवन—सब मिलकर एक उत्सव जैसा माहौल रच रहे थे। नए फर्नीचर पर बैठकर किताबें खोलते बच्चों के चेहरे बता रहे थे कि ये सिर्फ बेंच–डेस्क नहीं, बल्कि सम्मान और अवसर हैं।
कक्का की चौपाल ने यह साबित कर दिया कि जब गांव, कंपनी और समाज एक मंच पर आते हैं, तो शिक्षा केवल पाठ्यक्रम नहीं रहती—वह संवाद, संवेदना और सपनों का संगम बन जाती है। प्रभावित गांवों के बच्चों को बेहतर शिक्षा, पर्याप्त संसाधन और खुशहाल वातावरण मिले—इसी संकल्प के साथ यह पहल आगे बढ़ती रहेगी।