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एक पत्रकार की पत्रकारिता से लेकर के महामंडलेश्वर बनने तक की यात्रा का संघर्ष मय सफर,,,,,,

ललित अग्रवाल हिंदुस्तानी की पत्रकारिता से लेकर जूना अखाड़े की महामंडलेश्वर बनने की संघर्ष से भरी यात्रा वास्तव में प्रेरणादायक है। उन्होंने अपने जीवन की शुरुआत को संभालने के बाद में पत्रकारिता के क्षेत्र से शुरुआत की और धीरे-धीरे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी एक विशिष्ट पहचान बनाई।
📰 पत्रकार ललित अग्रवाल हिंदुस्तानी बने महामंडलेश्वर: कलम के सिपाही से 'ललितेश्वरानंद महाराज' तक की आध्यात्मिक यात्रा
जोधपुर, राजस्थान। देश के पत्रकारिता जगत में अपनी एक विशेष पहचान बनाने वाले और प्रसिद्ध सनातनी कार्यकर्ता ललित अग्रवाल हिंदुस्तानी ने अब अध्यात्म के शिखर पर कदम रखा है। पत्रकारिता से लेकर हिंदू संगठनों में सक्रिय भूमिका निभाते हुए, उन्हें हाल ही में जूना अखाड़े द्वारा 'ललितेश्वरानंद महाराज श्री श्री 1008' की उपाधि से विभूषित किया गया है।
🖋️ पत्रकारिता से राष्ट्र सेवा तक का सफर
ललित अग्रवाल हिंदुस्तानी ने अपने करियर की शुरुआत पत्रकारिता से की और जल्द ही राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई। उन्होंने निम्नलिखित प्रमुख पदों पर कार्य किया:
* भारतीय पत्रकार संघ (AIJ) के राष्ट्रीय सचिव।
* इंडियन फेडरेशन ऑफ वर्किंग जनरलिस्ट के अंतर्गत नेशनल सेक्रेट्री।
* वर्तमान में पत्रकार वेलफेयर एसोसिएशन रजिस्टर्ड भारत संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष।
उन्होंने दैनिक समाचार पत्र राष्ट्रीय शान, उपदेश टाइम, राष्ट्रीय जजमेंट, राष्ट्रीय पहल और स्वतंत्र प्रबोध पत्रिका जैसी विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वह IBN 20-20 मध्य प्रदेश में नेशनल ब्यूरो चीफ के पद पर भी कार्यरत रहे। नेपाल के काठमांडू में उन्हें भगवान पशुपतिनाथ के आशीर्वाद से सम्मानित भी किया गया था।
🚩 सनातन धर्म और हिंदू राष्ट्र निर्माण की ओर रुझान
धीरे-धीरे उनका रुझान सनातन धर्म और हिंदुत्व के लिए कार्य कर रहे संगठनों की तरफ बढ़ा। उन्होंने हिंदू राष्ट्र निर्माण के उद्देश्य से अपनी ऊर्जा को समर्पित किया और कई प्रतिष्ठित हिंदू संगठनों में महत्वपूर्ण दायित्व संभाले:
* अखिल भारतीय हिंदू परिषद मैं राष्ट्रीय मुख्य सचिव
* अखिल भारत हिंदू महासभा के
राष्ट्रीय महामंत्री
* कृष्ण जन्मभूमि संघर्ष न्यास
राष्ट्रीय महामंत्री
इन संगठनों में उन्होंने राष्ट्रीय मुख्य सचिव, प्रवक्ता, और राष्ट्रीय महामंत्री जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया और कर रहे हैं।
🙏 अखाड़ों से जुड़ाव और महामंडलेश्वर की उपाधि
उनकी यह यात्रा तब और भी महत्वपूर्ण हो गई जब वह विभिन्न अखाड़ों से जुड़े:
* महाकाल भैरव अखाड़ा : यहां उन्होंने राष्ट्रीय महासचिव के रूप में कार्य किया।
* अंतर्राष्ट्रीय सूर्यवंशी अखाड़ा: यहां राष्ट्रीय सचिव एवं मीडिया प्रभारी के रूप में सेवा की।
* अंतर्राष्ट्रीय सप्त ऋषि अखाड़ा: 2 वर्षों तक राष्ट्रीय सचिव और मीडिया प्रभारी के रूप में कार्य करने के बाद
उनकी देश राष्ट्र धर्म के प्रति लगन और सेवाओं को देखते हुए, अंतरराष्ट्रीय सप्त ऋषि अखाड़ा द्वारा उन्हें श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर ललित आदित्य महाराज के नाम से उपाधि प्रदान की गई है। यह उपाधि उन्हें उनके समाज सेवा और हिंदू राष्ट्र निर्माण के लिए कार्य करने के लिए दी गई है।
अखाड़ा प्रमुख जगतगुरु सच्चिदानंद बाल प्रभु जी ने उन्हें वृंदावन में 'श्री श्री 1008 ललित आदित्य महाराज' के रूप में महामंडलेश्वर की उपाधि प्रदान कर सम्मानित किया !!
👑 जूना अखाड़े द्वारा सर्वोच्च सम्मान
इस प्रारंभिक उपाधि के बाद, उन्हें देश के सबसे बड़े अखाड़ों में से एक, जूना अखाड़े से भी सम्मानित किया गया। उन्हें अवधूत सेवा संघ आश्रम, दिल्ली से, स्वामी मुकुंदानंद महामंडलेश्वर चक्र तीर्थ नैमिषारण्य (सीतापुर, उत्तर प्रदेश) के शिष्य स्वामी मंगलानंद जी महाराज द्वारा, 'स्वामी ललितेश्वरानंद जी महाराज' (चेला स्वामी मंगलानंद जी महाराज जी, महामंडलेश्वर जूना अखाड़ा) की उपाधि से विभूषित किया गया।
अंततः, जूना अखाड़े ने उन्हें 'ललितेश्वरानंद महाराज श्री श्री 1008' की सर्वोच्च उपाधि प्रदान कर उनके आध्यात्मिक समर्पण को मान्यता दी।
🗣️ नए दायित्व पर स्वामी ललितेश्वरानंद महाराज महाराज का उद्घोष
अपने नए दायित्व को सहर्ष स्वीकार करते हुए ललितेश्वरानंद महाराज ने अपने आशीर्वचन में कहा कि वह:
> "वह सदा ही सनातन धर्म और हिंदू राष्ट्र निर्माण के लिए समर्पित और समर्पण भाव से देश राष्ट्र धर्म और आमजन की सेवा के लिए सदैव आगे कर रहेंगे एवं हिंदुत्व की रक्षा और हिंदू राष्ट्र के निर्माण में सदा अग्रणी रहकर कार्य करते रहेंगे !!
उन्होंने इस मुकाम तक पहुंचने के लिए सभी जीवन के अपने मार्गदर्शकों , स्नेही जनों, शुभचिंतकों और गुरु मूर्तियों, गुरु जनों के साथ-साथ पथ प्रदर्शक व साधु-संतों को नमन वंदन अभिनंदन के साथ अपना आभार प्रकट किया।
निष्कर्ष: ललित अग्रवाल हिंदुस्तानी की यह यात्रा पत्रकारिता के माध्यम से सेवा, फिर हिंदू राष्ट्र के लिए संघर्ष और अंततः अध्यात्म में समर्पण को दर्शाती है। उनके जीवन में संघर्ष और सेवा ही उनका मूल मंत्र रहा है, जो आज उन्हें एक आदर्श के रूप में स्थापित करता है।

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