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बड़े पुत्र डॉक्टर अकरम द्वारा पिता जी के इलाज में सरकारी हॉस्पिटल में खर्च किए गए 15 लाख 80 वर्षीय विधवा मां द्वारा वापस न किए जाने पर अदालत में घसीटा

बड़े पुत्र डॉक्टर अकरम द्वारा पिता जी के इलाज में सरकारी हॉस्पिटल में खर्च किए गए 15 लाख 80 वर्षीय विधवा मां द्वारा वापस न किए जाने पर अदालत में घसीटा....

राम मनोहर लोहिया दिल्ली सरकारी हॉस्पिटल जहां फ्री इलाज, फ्री खाना… और 15 लाख का बिल!
— हौज भदेसरा, संभल से विशेष रिपोर्ट

हौज भदेसरा, हिलाली सराय, तहसील व जनपद संभल (उ.प्र.) में पिछले 37 वर्षों से कथित रूप से संचालित अल शिफा हॉस्पिटल एक बार फिर विवादों में है। इस विवाद के केंद्र में अकरम, उनकी पत्नी रजिया, पुत्र फहद, तथा कथित गवाह इमरान और रज़ा खान उर्फ सोनू सिंह हैं।

सूत्रों के अनुसार, अकरम यह दावा कर रहे हैं कि उनके पिता के इलाज पर राम मनोहर लोहिया, दिल्ली सरकारी अस्पताल में 15 लाख रुपये खर्च किए गए। उल्लेखनीय है कि राम मनोहर लोहिया अस्पताल एक सरकारी अस्पताल है, जहाँ निःशुल्क इलाज के साथ-साथ खाना-पीना भी निःशुल्क उपलब्ध कराया जाता है। ऐसे में अकरम और रजिया द्वारा किए गए 15 लाख रुपये के खर्च का दावा आमजन के लिए कौतूहल का विषय बना हुआ है।

विवाद तब और गहराया जब बड़े पुत्र अकरम द्वारा अपनी 80 वर्षीय विधवा माँ से इलाज में खर्चे किए गए 15 लाख की डिमांड बार बार की गई आरोप है कि इसके बाद घटनाओं की एक ऐसी श्रृंखला शुरू हुई, जिसमें तर्क से अधिक संयोग दिखाई देता है।

दिनांक 08/09/2024, समय सुबह 9 बजे, अकरम रजिया फहद द्वारा झूठा आरोप लगाया गया कि फहद अकरम के साथ घर में मारपीट हुई। ठीक उसी समय घर में लगे सभी सीसीटीवी कैमरे अचानक खराब हो गए।
इसी घटना के संबंध में इमरान और रज़ा खान उर्फ सोनू सिंह ने यह बयान दिया कि उन्होंने सुबह में तेज़ बल्ब की रोशनी में यह पूरी घटना अपनी नंगी आँखों और नंगे ज़मीर की आत्मा की रोशनी में देखी।

यहीं कहानी समाप्त नहीं होती।
उसी दिन दिनांक 08/ 09/20 24 को ही रात 9 बजे, एक बार फिर अकरम के साथ कथित मारपीट होने का दावा किया गया। संयोगवश, इस बार भी सीसीटीवी कैमरे काम नहीं कर रहे थे। और एक बार फिर, इमरान तथा रज़ा खान उर्फ सोनू सिंह ने यह दोहराया कि उन्होंने बल्ब की तेज़ रोशनी में अपनी नंगी आंखों और नंगे ज़मीर की पापी आत्म की रोशनी में पूरी घटना अपनी आँखों से देखी।

स्थानीय लोगों के अनुसार, यह मामला अब इलाज का नहीं बल्कि तर्क और गणित का बन चुका है—
जहाँ अकरम और रजिया के अनुसार
फ्री सरकारी अस्पताल + फ्री खाना = 15 लाख रुपये,
और
खराब सीसीटीवी कैमरे + तेज़ बल्ब = प्रत्यक्षदर्शी गवाही ज़र खरीद गुलामों जो 30 वर्षों से झूठी गवाहियां के माध्यम से ही अपना परिवार चला रहे हैं (इमरान और रज़ा खान उर्फ सोनू सिंह द्वारा)।
दिनांक 26 नवंबर 2025 को अकरम के हाथ में SDM कोर्ट फ्रैक्चर हुआ 27 नवंबर 2025 को ज़र खरीद गुलामों के सहारे सहारे अदालत के दरवाज़े पर जाकर बैठ गया आते जाते वकीलों ने समझा कोई सवाली बैठा है तो आने जाने वाले एक दो रुपए अकरम के हाथ पर रखते हुए जाने लगे डॉक्टर अकरम द्वारा विरोध करने की बजाय पैसे ले ले कर अपने जेब रखते रहे जब बिना मेहनत किए इंसान के हाथों में दौलत आने लगती है तो इंसान लालच में उसी काम के अपना काम बना लेता है।डॉक्टर अकरम द्वारा अदालत के गेट पर बैठने का सिलसिला डेली चल निकला डेली हज़ार आठ सौ रुपए बिना मेहनत किए आ रहे थे परंतु जब सभ्य लोगों की इस नए सवाली पर नज़र पड़ी तो अदालत चौखट से जबरन भगाया गया दिनांक 4 दिसंबर को ज़र खरीद गुलाम रज़ा खान उर्फ सोनू सिंह ने अपना झूठा बयान दर्ज करवाया अब 23 दिसंबर 2025 को झूठे गवाह इमरान द्वारा अपने दो छोटे छोटे मासूम बच्चों के सर पर हाथ रख कर झूठा बयान देने जाएगा सभी पाठक से प्रार्थना है कि 23 तारीख दिसंबर की अदालत परिसर में पहुंच कर झूठों की झूठी गवाहियां देखें।
शहर के लोगों का कहना हैं कि 15 लाख की बात करता है ये 15 पैसे न खर्च करेगा मां बाप भाई बहन के ऊपर।

फिलहाल, पूरा प्रकरण अदालत के विचाराधीन है। आम जनता के बीच चर्चा का विषय यही है कि—
इलाज का बिल किसने बनाया,
कैमरे कब ठीक होंगे,
और सच्चाई आख़िर किस रोशनी में सामने आएगी—सीसीटीवी की या बल्ब की?

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