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500 वर्षों में पहली बार बांके बिहारी को नहीं लगा बाल भोग टूटी परंपरा

500 वर्षों में पहली बार बांके बिहारी जी को नहीं लगा बाल भोग, टूटी सदियों पुरानी परंपरा

वृंदावन।
श्री बांके बिहारी मंदिर में एक ऐतिहासिक और भावुक कर देने वाला दृश्य सामने आया, जब करीब 500 वर्षों में पहली बार ठाकुर बांके बिहारी जी को बाल भोग अर्पित नहीं किया गया। सदियों से चली आ रही यह परंपरा अचानक टूटने से श्रद्धालुओं और सेवायतों के बीच गहरी चर्चा का विषय बन गई है।

मंदिर परंपरा के अनुसार, प्रतिदिन प्रभु को बाल रूप में विशेष भोग अर्पित किया जाता रहा है, जिसे भक्त अत्यंत आस्था और श्रद्धा के साथ देखते आए हैं। लेकिन इस बार विशेष परिस्थितियों के चलते बाल भोग नहीं लगाया जा सका। जैसे ही यह खबर फैली, पूरे वृंदावन में भक्तों के बीच भावनाओं का सैलाब उमड़ पड़ा।

सेवायतों का कहना है कि यह निर्णय परिस्थितिवश लिया गया है और इसका उद्देश्य परंपरा का अपमान नहीं, बल्कि व्यवस्था और मर्यादा का पालन करना है। वहीं, श्रद्धालु इसे एक असाधारण और ऐतिहासिक क्षण मान रहे हैं, जो आने वाले समय में मंदिर के इतिहास में दर्ज रहेगा।

भक्तों की आस्था आज भी अटूट है और सभी की यही प्रार्थना है कि जल्द ही श्री बांके बिहारी जी की पुरानी परंपराएं फिर से पूरे विधि-विधान के साथ निभाई जाएं और बाल भोग की मधुर परंपरा पुनः प्रारंभ हो।

जय श्री बांके बिहारी 🙏

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