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जिस खबर ने कुछ नफरत के सौदागरों की नींद उड़ा दी…”

🟥 “जिस खबर ने कुछ नफरत के सौदागरों की नींद उड़ा दी…”
(और आगे पढ़ते-पढ़ते आपका दिल भी पिघल जाएगा)
बक्सर के एक छोटे से गांव — डेवी डीहरा — में वो हुआ है,
जिससे नफ़रत की राजनीति करने वालों को ज़रूर जलन हुई होगी।
क्योंकि जो कहानी है, वो उनके एजेंडे की सबसे बड़ी दुश्मन है।
18 नवंबर को शिवम…
एक ऐसा लड़का, जिसे गांव में हर कोई “मिलनसार” कहता था,
एक सड़क हादसे में चला गया।
घर टूट गया… माँ-बाप बिखर गए…
लेकिन देखिए, दुख में भी इंसानियत किस तरह खिलती है।
श्राद्ध के दिन—
इस परिवार ने ऐसा फैसला किया,
जिसकी उम्मीद अब समाज बहुत कम कर चुका था।
उन्होंने अपनी एक बीघा जमीन मुस्लिम समाज के कब्रिस्तान के नाम दान कर दी।
हाँ, आपने सही पढ़ा।
दुख को उन्होंने नफ़रत में नहीं बदला,
बल्कि भाईचारे में बदल दिया।
जमीन का नाम रखा गया —
“शिवम उर्फ अहीर धाम कब्रिस्तान”
ताकि शिवम की याद हमेशा प्रेम और सौहार्द की कहानी कहती रहे।
बक्सर में लोग कह रहे हैं—
“ये सिर्फ ज़मीन की दान नहीं,
ये समाज को दिया गया एक सबक है।”
और उधर दूसरी तरफ…
कुछ नेताओं को ये खबर पढ़कर
अंदर ही अंदर ज़रूर आग लगी होगी,
क्योंकि ऐसी कहानियाँ
उनकी नफ़रत की फ़सल को जड़ से उखाड़ देती हैं।
कभी-कभी एक गाँव,
पूरे देश को रास्ता दिखा देता है

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