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सहारा इंडिया पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश क्यों नहीं लागू हो पा रहे? करोड़ों पीड़ित जमाकर्ताओं का सवाल तेज

देशभर के सहारा पीड़ितों में फिर आक्रोश उभर आया है। आरोप है कि पिछले 12 वर्षों में सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के कई स्पष्ट आदेशों के बावजूद सहारा इंडिया न तो भुगतान कर रहा है और न ही अदालत के निर्देशों का पालन कर रहा है। इससे करोड़ों जमाकर्ताओं की मेहनत की कमाई फंसी हुई है।

पीड़ितों के प्रमुख आरोप:
1. 31 अगस्त 2012 को सुप्रीम कोर्ट ने सहारा की दो कंपनियों को निवेशकों का भुगतान करने का आदेश दिया था, लेकिन सहारा ने भुगतान के बजाय कथित रूप से रकम को अपनी अन्य सोसायटियों और कंपनियों में घुमा दिया।
2. अदालत द्वारा आदेशित 24,700 करोड़ रुपये की राशि भी वर्षों बाद पूरी तरह SEBI में जमा नहीं की गई।
3. सुप्रीम कोर्ट ने सहारा की 71 जमीनों पर रोक लगाते हुए निर्देश दिया था कि बिना कोर्ट अनुमति कोई बिक्री नहीं होगी और बिक्री का सारा पैसा SEBI में जमा होगा। पीड़ितों का आरोप है कि कई जमीनें बेची गईं और रकम अदालत को बताए बिना दूसरी जगह उपयोग में ले ली गई।
4. दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा सहारा की 3 सोसायटियों पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद भी सहारा समूह ने कथित तौर पर नई कंपनियाँ बनाकर निवेश जुटाना जारी रखा।
5. सितंबर 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने SEBI में बकाया 9,000 करोड़ रुपये 9 महीनों में जमा करने का आदेश दिया था। सहारा ने वर्सोवा और एंबी वैली में ज्वाइंट वेंचर कर रकम जमा करने का दावा किया था, लेकिन न ज्वाइंट वेंचर हुआ और न ही रकम जमा की गई।

पीड़ितों का बड़ा सवाल:
क्या सुप्रीम कोर्ट और सरकारी एजेंसियाँ सहारा के सामने लाचार हैं? क्या किसी बड़े वित्तीय नेटवर्क या कानूनी जाल ने अदालत के आदेशों को निष्प्रभावी बना दिया है? या फिर सहारा को कानून से ऊपर मान लिया गया है?
देश के करोड़ों सहारा पीड़ित आज यही सवाल उठाते हुए न्याय की उम्मीद में अदालतों और सरकार दोनों की ओर देख रहे हैं।

समाचार लेखन-सहारा समूह मामलों के विशेषज्ञ-नौशाद अली

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