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हजारों लोगों को उजाड़ कर हवाई आवाजाही के लिए हवाई अड्डे की शुरूआत---

बोकारो शहर मे हवाई अड्डे के शुरूआत पर,शहर मे हवाई जहाज के परिचालन पर जोर शोर से काम चल रहा है।लेकिन इसमे विलंब के पिछे का कारण हवाई अड्डे के इर्द गिर्द बसे झुग्गी झोपड़ी और दू°दीवाद बाजार को माना जा रहा है। बोकारो की राजनीतिक पार्टियां अपनी अपनी राजनीति को चमकाने में लगे हैं। उन्हे समझ नहीं आ रहा की ऐसे हालात में जबकि हवाई अड्डे की शुरुआत तय है,इन पार्टियों को मिलकर जिला प्रशासन और
बोकारो इस्पात प्रबंधन से मिलकर पुनर्वास की योजना पर काम करना चाहिए।
इन्ही मुद्दे पर बोकारो जिला कांग्रेस के अंदर भी मतभेद दिखाई पङ रही है। किसी भी पार्टी के लिये आपसी मतभेद हो खत्म कर आपसी सहमति तय कर काम करना चाहिए।
किसी शहर मे हवाई अड्डे का होना उस शहर की समृद्धि का आईना होता है l सवाल है कि बोकारो स्टील सीटी क्या एक समृद्ध शहर है?हवाई अड्डे और हवाई जहाज के परिचालन शुरू करने के पहले शहर की जो जवलंत समस्या है उस पर विचार करना जरूरी है। बोकारो शहर एक समय मे व्यवस्थित शहर के रूप में जाना जाता था।पिछले 20 वर्षो में जिस तेजी से बोकारो इस्पात कारखाने के प्रबंधन और उत्पादन क्षमता मे गिरावट आई है और शहर की आवादी में वृद्धि दर्ज की गई है , पुरा शहर एक कस्बे का रूप धारण कर लिया है। रोजी रोटी की तलाश मे आए लोगों के रख रखाव और नियोजन व्यवस्था पर ना तो किसी राजनीतिक पार्टी ने ध्यान दिया ना हि बोकारो इस्पात प्रबंधन ने कोई सुध लेने सका।परिणाम पुरा शहर
अतिक्रमण के चपेट में आ गया। लोग जहाँ तहा झोपड़ी बनाकर रहने लग गये।अपनी रोटी रोजी के लिए जहाँ तहाँ फुटपाथ पर बैठ कर झोपड़ी बनाकर छोटे छोटे व्यवसाय करने लगे और साथ में लोग वहीं अपना आशियाना बना लिए ।शहर मे अफरा तफरी बढने लगी और पुरा शहर अतिक्रमण का शिकार हो गया।कानून व्यवस्था दम तोड़ती नजर आती है।
1980 और 1990 के दशक तक बोकारो बिहार का सबसे व्यवस्थित और सुंदर शहर हुआ करता था। बोकारो इस्पात शहर का नाम लेने में खुद को गौरवान्वित महसूस करते थे।
बोकारो का मुख्य बाजार सीटी सेंटर एक प्रतिष्ठित और व्यवस्थित जगह हुआ करती थी।लोग हफ्ते भर पहले सीटी सेंटर की सैर करने की योजना बनाया करते थे।
देवी टाकीज एक समय बोकारो की शान हुआ करती थी। आज वही सीटी सेंटर एक बदबुदार जगह बन गई है। पुरा सीटी सेंटर गढो मे तबदील होकर कार पार्किंग की जगह बन गई है। चारो ओर से सीटी सेंटर ठेले खोमचे वालों से घिर चूका है।पुरे शहर को अतिक्रमित कर लिया गया है।जगह जगह शराबियों का अडडा सा बन गया है।सङक के किनारे हजारों दुकानें अतिक्रमण कर खोली जा चुकी है।सबसे ज्यादा छोटे छोटे होटलो की भरमार है। सङको पर इन होटलों से निकलने वाली गंदगी और बजबजाते गंदे जल, सङको पर बहती देखी जाती है। बिजली चोरी कर दुकानें चलाई जा रही हैं। ओवरलोड की वजह से आए दिन शार्ट सर्किट की घटनाएं घटती रहती है।हाल हि मे फुटपाथ पर लगी कई दुकानें शार्ट सर्किट की वजह से आग की लपेट में आ गई, जिससे लोगों को लाखों का नुकसान हो गया।अतिक्रमण की वजह से पुरे शहर मे खटालो का साम्राज्य कायम है।गाय भैंस सङको पर घूमते पाये जाते हैं।
बोकारो स्थित दुनदीवाद मार्केट जिसे बोकारो प्रबंधन ने हि बसाया था। इस बाजार से लाखों लोगों की जीविका चलती है,इसे हटाने के पहले जिला प्रसाशन और बोकारो इस्पात प्रबंधन को इनके लिए अतिरिक्त जगह की व्यवस्था पर काम करना चाहिए। हवाई अड्डे खुलने चाहिए लेकिन लोगों को उजाड़ कर चंद लोगों की महत्वाकांक्षा की पूर्ति के लिये तत्पर होना एक भयावह स्थिति पैदा कर सकती है। अतः प्रशासनिक दृष्टिकोण से बसे बसाये लोगों को हटाना समाज में अराजकता की स्थिति उतपन्न कर सकती है। ऐसे हि पुरा देश बेरोजगारी,भुखमरी और अनिश्चितता का शिकार हो चुकी है।
नरेन्द्र-

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