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जमाना तभी दास रहेगा जब अपना कुटुम्ब एक मुट्ठी है एकजुट एकमत -- डीआर सैणी

चंडीगढ़ 30 नवंबर 25 आर विक्रम शर्मा रक्षा शर्मा अनिल शारदा हरीश शर्मा करण शर्मा प्रस्तुति--- जिंदगी में संभलने के लिए ठोकर एक ही काफी होती है। सारी दुनिया तब तक आपकी दास रहेगी जब तक आपका कुटुंब आपका परिवार आपके साथ एकजुट एकमत है।। आज डीआर सैनी की यह कहानी जो आत्मा तक को झकझोर देती है आपको एक सबल सबक देती है। अल्फा न्यूज़ इंडिया के माध्यम से लाखों पाठकों के लिए प्रस्तुत की जा रही है।।

वकील ने फोन किया "अरविंद जी एक बुरा समाचार है। " अरविंद बोला " अब बुरा समाचार कहा से आ गया? आप तो बोल रहे थे एक दो पेशी मे हम केस जीत जाएंगे

वकील बोला " मुझे खबर मिली है आज आपका भाई आपके दुश्मनो की तरफ से आपके खिलाफ गवाही देने वाला है।

अरविंद बोला " विवाद तो कोई खास नही चल रहा वकील साहब । मगर चार पांच साल से भाई से बोलचाल बन्द है। "

वकील बोला "अगर विवाद नही चल रहा तो उसे फोन करके मना कीजिए। अगर आपके भाई ने आपके खिलाफ गवाही दी तो हमारा केस कमजोर पड जाएगा।

अरविंद बोला " मगर इस केस से भाई का क्या लेना देना है। उसकी गवाही से केस कैसे कमजोर पड जाएगा।? " वकील बोला " अगर आपका भाई ये गवाही दे दे कि आप लालची और फ्रॉड किस्म के हो। आपने उसके साथ भी सम्पति बांटने मे बेईमानी की है। तब इस केस मे हमें अपनी लोयल्टी सिद्ध करने मे परेसानी होगी। आप एक बार अपने भाई से बात कीजिए। "

वकील के फोन काटने के बाद अरविंद बैचेन हो गया। भाई दुश्मनों के साथ मिल गया है ये सोचते हुए उसका दिल बैठा

अरविंद की पत्नी रसोई मे काम करते हुए सब सुन रही थी। वह अरविंद के पास आकर बोली " क्या कह रहे है वकील साहब ? देवर जी हमारे खिलाफ गवाही दे रहे हैं? "

अरविंद बुझे मन से बोला " किशोर से मुझे ये उम्मीद नही थी गायत्री। खुद की भुजा ही शरीर को नुकसान पहुंचाएगी तो हम कैसे जीतेंगे? " गायत्री बोली " बिक गया होगा आपका भाई। दुश्मनों ने जरूर उन्हे लालच दिया होगा। आप अपने भाई को फोन मिलाइये। मैं बात करती हूं उनसे । "

अरविंद ने कांपते हाथो से भाई को फोन मिलाया। मगर भाई ने फोन नही उठाया।

पत्नी बोली " आप उनके घर जाईए उनसे बात कीजिए। हमारे आपसी झगड़े मे दुश्मनों को फायदा मिल रहा है। अगर भाई से सुलह नही करोगे तो हम हार जाएंगे। "

अरविंद विचलित मन से कुर्सी पर पसरता हुआ बोला "अगर उसे मुझसेबात करनी होती तो फोन उठा लेता। अब घर जाने से भी कोई फायदा नही है। तुम चिंता मत करो जो होगा सो देखा जाएगा। "

अरविंद की पत्नी बड़बड़ाती हुई वापस रसोई मे चली गई। मगर अरविंद के माथेपर चिंता

की लकीरें उभर आई थी। वह उस दिन को कोस रहा था जिस दिन उसने महिपाल के साथ साझीदारी

मे जमीन खरीदी थी।

महिपाल और अरविंद ने मिलकर

दस साल पहले 20 लाख रुपयों में एक जमीन खरीदी थी।

अब जमीन की कीमत 50 लाख रुपये से ऊपर थी।

पिछले दस सालो मे अरविंद ने महिपाल को 15 लाख रुपये उधार दे दिये थे। तब महिपाल ने कहा था "तुम वह पूरी जमीन रखो। मेरे हिस्से के पैसे समझ लो

जब तुम जमीन बेचोगे तब मै बिना कुछ पैसे लिए उन कागजो पर दस्तखत कर दूंगा।

मगर जब अरविंद जमीन बेचने लगा तब महिपाल ने कहा " " आधी जमीन मेरी है आधे पैसे दोगे तभी दस्तखत करूँगा।

समझौता मौखिक हुआ था ।

अरविंद बोला " लेकिन तुम्हारे हिस्से के मै तुम्हे 15 लाख रुपये दे चुका हूँ।

जब हमने तुम्हारे हिस्से का हिसाब किया था तब जमीन की कीमत 30 लाख

रुपये थी। इसलिए तुम्हारा अब उस जमीन पर कोई हक नही है।"

महिपाल बोला " समझौते के कागज दिखाओ।" अरविंद के पास इसका कोई प्रमाण नही था। इसी बात को लेकर दोनों कोर्ट मे पहुँच गए थे।

कोर्ट मे महिपाल अरविंद के भाई किशोर के साथ पहुंचा था। आज महिपाल के चेहरे पर कुटिल मुस्कान थी। जिसे देखकर अरविंद का कलेजा बैठा जा रहा था।

मुकदमा शुरू हुआ तब महिपाल

का वकील बोला " मिलार्ड मेरे मुवक़िल का साझीदार अरविंद निहायत ही घटिया आदमी है। धोखा करना इसकी पुरानी आदत है। जिस शक्स ने अपने सगे भाई को नही छोड़ा वह दूसरों के साथ बेईमानी करने से कैसे बाज आ सकता है?"

महिपाल का वकील बोला " जजसाहब, मै प्रतोवादी पक्ष के सगे भाई को बातौर गवाह पेश करना चाहता हूँ। मिस्टर अरविंद की फितरत कैसी है आप उसके भाई के मुख से सुन लीजिए।

फिर किशोर कटघरे मे आकर खड़ा हो गया।

अरविंद ने एक नजर अपने छोटे भाई पर डाली। दोनो भाईयो की नजरें मिली। अरविंद की नजरों मे लाचारी और बेबसी थी। आँखो मे पानी था।

जज साहब ने इशारा किया तो किशोर ने भगवत गीता की शपथ लेकर बोलना शुरू किया।

"जज साहब मै अरविंद कुमार का छोटा भाई हूँ। मेरा बचपन उनकी गोद मे बीता है। पिता के गुजरने के बाद उन्होंने मुझे पिता का प्यार भी दिया है। अगर उनके आचरण और फितरत के बारे मे बताऊँ। तो सिर्फ इतना ही कहूंगा वो मेरे लिए भगवान राम है। वो कभी झूठ नही बोलते । जो इंसान झूठ नही बोलता वो भला किसी के साथ बेईमानी और धोखा कैसे कर सकता है। "

किशोर के इतना कहते ही महिपाल और उसके वकील का मुँह उतर गया। उधर अरविंद की आंखे भर आई। वह भाई को ऐसे निहार रहा था जैसे बचपन मे उस मुस्कराते देखकर

किशोर बोला " जज साहब ये महिपाल और उसका वकील कल मेरे घर आए थे। इन लोगों ने मुझे पैसो का लालच देकर

मेरे भाई के विरुद्ध बोलने के लिए तैयार किया था। इन्होंने मुझे क्या क्या कहा उसका मैने वीडियो बना लिया है। फिर जेब से उस वीडियो का सबूत किशोर ने जज साहब को सौंप दिया।

जज साहब ने वीडियो देखा फिर अपना फैसला अरविंद के पक्ष मे सुना दिया। और महिपाल और उसके वकील के विरुद्ध लीगल कार्यवाही

करने का आदेश दे दिया। कोर्ट के बाहर निकलते ही अरविंद की नजर भाई को तलाश कर रही थी। मगर किशोर भाई की नजर बचा कर चुपके से अपने घर चला गया था।

उसके बाद अरविंद अपने पूरे परिवार को लेकर किशोर के घर गया। पुराने गिले शिकवे दूर किये और दोनो भाई गले मिल गए। दोनों परिवार फिर से एक हो गए।

कहानी का मोरल :- भाईयो के बीच आपस मे कितने भी मतभेद हो ।

मगर जब भाई संकट मे हो तो उसकी ढाल बन जाओ। एक और एक मिलकर 11 बन जाओ और दुश्मन के 12 बजा दो यही एक भाई का कर्तव्य है। साभार लेखक डी आर सैनी। पोस्ट अच्छी लगे तो शेयर करें।

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