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शीर्षक 🌼 मोक्षदा एकादशी एवं गीता जयंती 🌼

शीर्षक
🌼 मोक्षदा एकादशी एवं गीता जयंती 🌼

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छंद – १ : मोक्षदा की पुण्य प्रभा

एकादशी की पावन बेला, दीपक करता ध्यान प्रज्वल,
भक्त भाव से लगे द्वार पर, हरि का नाम सुधा सा छलक।
उपवास तप में रमे मनुज, अंतर पावन बने निष्कलंक,
मोक्षदायिनी माँ की कृपा, हर ले जन्म-जरा का अंक।

व्रत की शक्ति अलौकिक मानी, हृदय दैवी रस से भरपूर,
धर्म-श्रद्धा का संगम लेकर, मन जगता सद्गुण से चूर।
हरि चरणों में झुके शीश, जग में शांति का बहे समीर,
मोक्ष सुधा दे आज की तिथि, भक्त मनाए मंगल धीर।

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छंद – २ : गीता का उपदेश अमर

कुरुक्षेत्र रणभू में गूंजा, कृष्ण वचन का दिव्य प्रकाश,
शोक-भ्रमित अर्जुन को देखा, तब ली योगेश्वर ने आस।
धर्म-युद्ध का सत्य समझा, कर्तव्य-मार्ग दिखाया फिर,
अज्ञान तमस हटा पलभर में, उजली बुद्धि हुई निर्भ्रांत।

गीता है जीवन का सार, कर्म योग की देती प्रेरण,
सात्विक बुद्धि, समत्व मार्ग, जग-जीवन में व्रत का क्षरण।
हर अध्याय अमर उपदेश, मन को दे उदात्त प्रकाश,
आज भी जिनसे जग चलता, यही सनातन ज्ञान विलास।

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छंद – ३ : मोक्ष और गीता का संगम

मोक्षदा की प्रभु कृपा मिले जब, गीता-ज्ञान मिलाए राह,
दोनों मिलकर जीवन गढ़ते, बनते शुभ-संस्कार अथाह।
एक पवित्र करे अंतःकरण, एक दिखाए कर्म का सत्य,
युग युग से दोनों दीपक से, जग में फैली उनकी सृष्टि।

पाप-ताप सब धुल जाते हैं, व्रत संग शास्त्र सुधा पिये,
शांत, दृढ़, निर्मल हो मनुष्य, धर्म-साधना पथ पर जिये।
मोक्षदा–गीता संग मन में, चेतन ज्योति सदा अमर हो,
ज्ञान-भक्ति का यह उत्सव, मानव जीवन का सुंदर क्षोभ।

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छंद – ४ : भक्त की प्रार्थना

हे माधव! हे पार्थ-सखा! जीवन का तू ही है सार,
तेरा गीता-ज्ञान अजर है, मन से मिटा दे संशय भार।
व्रत का फल दे मोक्ष-सुधा, अंतर्मन को दे आलोक,
जन्म-जरा के संकट हर ले, दे उपकारों का संयोग।

रहे समर्पण तेरे चरणों में, यही हमारा सच्चा धन,
सत्य-अहिंसा, प्रेम-पथिक बन, हो दैवी गुणों का अनुबन्ध।
आज की यह शुभ तिथियाँ, जग में सद्भाव जगाए नित,
मोक्षदा–गीता जयंती की, जय-जयकार रहे अनंत।

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डिस्क्लेमर :-

यह रचना कवि 🖌️🖌️ सुरेश पटेल सुरेश की मौलिक छंद-शैली कृति है;
इसके भाव, विचार एवं प्रस्तुति पूर्णत: लेखक के स्वत्वाधिकार में सुरक्षित हैं।
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