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अंतराष्ट्रीय पुरुष दिवस पर इंडस् सिंधु ऑर्गनाइजेशन की भारत सरकार से मांग।


नई दिल्ली। 19 नवंबर को विश्व भर मे अंतराष्ट्रीय दिवस मनाया जाता है और भारत मे भी इस दिन लोग पुरुषो के समाज मे योगदान पर संगोष्ठी एवं बधाई संदेश देते है। सामाजिक संस्था इंडस् सिंधु ऑर्गनाइजेशन के अध्यक्ष नितिन कालरा ने सभी को इसकी बधाई देते हुए भारत सरकार से देश मे सामान कानून प्रणाली की मांग करते हुए इसे पुरुष विरोधी बताया। कालरा ने कहा जहा एक और देश मे विवाह का सीजन चल रहा है वही दूसरी ओर फैमिली कोर्ट मे तालाक के मुकदमो का जोर है। लड़के वाले कितने सही कितने गलत इसका फैसला होने से पहले ही उन्हे मुजरिमो सा सलूक किया जाता है। चाहे महिला थाने मे या उसके बाद दर्ज होने वाली एफ आई आर हो सब तरह एक तरफा व्यवहार। जमानत लेने को मजबूर लड़के के परिवार के पास कोई राहत की उम्मीद नही रहती। मासिक भता हो या स्त्री धन सब बोझ कोर्ट मे पुरुष के उपर ही पड़ता है। शायद यही कारण है की युवा पीढ़ी का धीरे धीरे विवाह प्रणाली से मोह भंग हो रहा है। लड़की और उसके परिवार की नजयाज़ मांगे विवाह उपरांत जो मानसिक तनाव पुरुषो के लिए उत्पन्न करती है इसका संज्ञान कोई नही लेता जिससे अधिक पीड़ा देने वाला और क्या होगा? कालरा ने सरकार से gender neutral कानून प्रणाली की मांग पर जोर दिया ये कहते हुए की कही तो पुरुषो के साथ कंधा मिला कर चलने की बात महिलाएं करती है दूसरी तरफ पुरुष इस देश के कर दाता भी है और उनके परिवार की महिलाए भी किसी की बहु बेटी है ऐसे मे ये भेदभाव आखिर क्यों?

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