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भीड़ ज़्यादा होने के कारण सभी इंतेज़ाम धराशाई होते दिखे तो खान साहब ने मुझसे कहा ये ही मेरी ज़िंदगी हैं,

रात के अंधेरे में आज़म ख़ान साहब मेरे गांव में मेरे घर पहुंचे और न सिर्फ़ परिवार से बल्कि क्षेत्र के सभी लोगों से मुलाकात की, आज़म साहब 6 घंटे लंबा सफ़र तय करके मेरे गांव की टूटी फूटी सड़कों से घर पहुंचे और इस ज़मीन को ऐतिहासिक कर गए क्योंकि किसी ने नहीं सोचा था कि आज़म किसी ऐसे गांव में भी आ सकते हैं जहां सड़क नहीं बल्कि खड़ंजा हैं और खड़ंजा भी हज़ारों गड्ढों से बना हुआ हैं!

जैसे ही मैंने आज़म साहब के पास अपनी भतीजी की शादी का न्योता भेजा तो तय कर लिया गया कि आज़म साहब ज़ाकिर अली त्यागी के घर हर हाल में पहुंच रहे हैं इसके लिए उन्हें आजमगढ़ और बहराइच के बहुत ही महत्वपूर्ण प्रोग्राम तक कैंसिल करने पड़े, ये मेरे लिए बड़ी बात हैं कि खान साहब अपने पहले से फिक्स प्रोग्रामों को रद्द कर मेरे घर पहुंचे और मेरी भतीजी को एक बंद झोले में खूबसूरत सा तोहफ़ा दिया!

मैंने आज़म साहब के लिए बंद कमरे में खाने के लिए इंतेज़ाम किया लेकिन उन्होंने बंद कमरे में खाने से इनकार करते हुए साफ़ कहा कि मैं खाना उसी जगह खाऊंगा जहां सभी लोग खा चुके हैं व खाएंगे, आज़म साहब ने भीड़ के बीच बैठकर साथ खाना खाया और सभी से बातचीत कर मुझे प्यार से नवाज़ मेरे इलाके को खुश कर लौट गए!

भीड़ ज़्यादा होने के कारण सभी इंतेज़ाम धराशाई होते दिखे तो खान साहब ने मुझसे कहा ये ही मेरी ज़िंदगी हैं, और अब मुझे इंतेज़ाम नहीं बल्कि खुशियां चाहिए कि इन्हीं लोगों से मिलती हैं!

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