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"अधूरी रही महाकाल दर्शन की यात्रा"

“अधूरी रही महाकाल दर्शन की यात्रा”
सुबह की हल्की धूप… रास्ते में फैला सन्नाटा… और एक परिवार, जो कानपुर से उज्जैन के लिए निकला था — बाबा महाकाल के दर्शन करने।
मन में श्रद्धा, चेहरों पर मुस्कान… लेकिन किसे पता था कि ये सफर अधूरा रह जाएगा।

कानपुर से उज्जैन जा रही कार को सामने से आ रहे ट्रक ने टक्कर मार दी।
गाड़ी में 6 लोग सवार थे… टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि कार के परखच्चे उड़ गए।
घायल लोगों को तत्काल जिला अस्पताल लाया गया…
डॉक्टरों ने पूरी कोशिश की — CPR दिया, ऑक्सीजन लगाई, हर संभव उपचार किया…
लेकिन नियति शायद कुछ और ही लिख चुकी थी।
10 वर्षीय कुंज शुक्ला और परिवार के मुखिया शिवलाल शुक्ला…दोनों ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया।
अस्पताल के बाहर चीखते-रोते परिजन…
डॉक्टरों की थकी आँखें और समाजसेवियों के उदास चेहरे…
हर किसी के होंठों पर बस एक ही बात —
“काश… कुछ पल और मिल जाते…”
बाबा महाकाल के दर्शन की आस लिए निकला परिवार, खुद ही बन गया एक दर्दनाक कहानी का हिस्सा।
एक मासूम बालक की मुस्कान, एक माँ का आंचल, और एक पिता का साया…
सड़क पर बिखर गए, हमेशा के लिए।
मंदिर की घंटियाँ बजती हैं…
महाकाल की आरती की गूंज में घुल जाती है तीन आत्माओं की मौन पुकार।
और पीछे रह जाती है — एक अधूरी यात्रा, एक अधूरी प्रार्थना, और कुछ न मिटने वाले आँसू।

इस हादसे का असली जिम्मेदार सिर्फ एक ड्राइवर नहीं, बल्कि वो सिस्टम है जो सड़कों को सुरक्षित नहीं रख पाया।
हर बरसात के बाद सड़कें गड्ढों में बदल जाती हैं, पर मरम्मत सिर्फ कागजों में होती है।
जहाँ चेतावनी बोर्ड होने चाहिए, वहाँ अंधेरा है।
जहाँ निगरानी होनी चाहिए, वहाँ लापरवाही है।
तीन ज़िंदगियाँ चली गईं — पर सिस्टम अब भी खामोश है।

#गुना #समाचार

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