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बोटाद में लगातार बारिश से किसान बेहाल; मूँगफली-कपास की फसल बर्बाद, मुआवजे की मांग तेज

बोटाद में लगातार बारिश से किसान बेहाल; मूँगफली-कपास की फसल बर्बाद, मुआवजे की मांग तेज

बोटाद (गुजरात) — पिछले 6–7 दिनों से जारी अनियंत्रित, कमोसमे बारिश ने बोटाद और आसपास के जिलों के किसान-परिवारों के सपने लौह-कपट बना दिए हैं। मूँगफली (गुजरात में प्रचलित नाम: मungfali/groundnut) और कपास की तैयार फसलें खड़ी हालत में ही पानी और हवा के कारण बुरी तरह प्रभावित हुई हैं; कई खेतों में फसलें पूरी तरह नष्ट हो चुकी हैं और किसान मुश्किल हालात में हैं।

कई गांवों में किसान कह रहे हैं कि पाँच महीनों की मेहनत, निवेश और उम्मीदें पल भर में ध्वस्त हो गईं। खेतों में लगे खाद-बीज, ट्यूबवेल की मरम्मत-खर्च और उधार की राशि — सब खलिहान की मिट्टी में धंसते दिखती है। स्थानीय स्रोतों और रिपोर्टों के मुताबिक प्रभावित किसानों ने तुरंत मुआवजे और राहत की माँग उठाई है, और प्रशासन ने सर्वे/प्रारम्भिक जांच शुरू करने की बात कही है।

किसानों की नाराजगी सिर्फ मौसमी तबाही तक सीमित नहीं है — वे इस बात पर भी गुस्से में हैं कि राजनीतिक दल इस दुख का राजनीतिकरण कर रहे हैं। किसान बताते हैं कि वो अपनी समस्याएँ हल करवाने की अपेक्षा दिखावे और बयानबाज़ी ही देखते हैं; आम आदमी पार्टी, कांग्रेस या भाजपा — तीनों ही पक्ष कभी-कभार जोरदार बयान देते हैं पर जमीन पर राहत की कार्रवाई जितनी त्वरित होनी चाहिए, वह नहीं दिख रही। (यह किसानों की व्यथा और स्थानीय माहौल का वर्णन है; इन राजनैतिक आपत्तियों की अलग-अलग भर्त्सना/समर्थन की विस्तृत पुष्टि स्थानीय रिपोर्टिंग पर निर्भर करेगी।)

साथ ही, गुजरात के कई हिस्सों में कोहरे (घने कोहरे/धुंध) की समस्या भी बनी हुई है — सुबह-सवेरे दृश्यता कम होने से लोगों को आवागमन में परेशानी हो रही है और सड़कों-रेल मार्गों पर सतर्कता की जरूरत है। मौसम विभाग की हालिया चेतावनियों और स्थानीय मौसम रिपोर्टों के अनुसार नवंबर के पहले दिनों में राज्य के कुछ हिस्सों में असामान्य मौसमी बदलाव और स्थानीय तौर पर कोहरे की घटनाएँ देखी जा रही हैं। इससे किसानों और ग्रामीण इलाकों की दैनिक गतिविधियाँ और भी प्रभावित हो रही हैं।
क्या-क्या किया जाना चाहिए (तुरंत आवश्यक कदम)
1. प्रभावित क्षेत्रों का तेज़ सर्वे कर के फसल-नुकसान का त्वरित आकलन और प्रमाणन किया जाए, ताकि किसानों को शीघ्र मुआवजा मिल सके।
2. फसलों के खराब होने पर राहत पैकेज (बीज/उर्वरक/खाद/नकद सहायता) तत्काल जारी किया जाए और बैंक/किसान क्रेडिट-कार्ड पर रियायत दी जाए
3. पानी निकासी और खेतों की मरम्मत में स्थानीय प्रशासन, ग्रामीण विभाग व कृषि विज्ञान केंद्र (Krishi Vigyan Kendra) की मदद उपलब्ध कराई जाए।
4. राजनीतिक दल और स्थानीय नेता सुनिश्चित करें कि राहत-कार्य राजनीति से ऊपर रखें; किसान के जीवन और रोज़गार को प्राथमिकता दी जाए। (यह किसानों और स्थानीय समुदाय की मांग है)।
किसानों की आवाज — एक पुकार

“हमारी फसलें बर्बाद हो रही हैं, ऋण बढ़ रहा है और घर चलाना मुश्किल हो गया है,” कई किसान तालुका-केंद्रों में यही कहते पाए गए। वे सरकार से त्वरित मुआवजा, बियासी सहायता और दीर्घकालिक बीमा/जोखिम कमी योजनाओं की मांग कर रहे हैं ताकि भविष्य में ऐसी आपदा से बचाव के उपाय लागू हो सकें।

यह एक गंभीर मानवीय और आर्थिक संकट है — बोटाद के किसान केवल एक मौसम की मार नहीं सह रहे; उनके परिवारों की आज़ीविका दांव पर लगी हुई है। स्थानीय प्रशासन, राज्य सरकार और केन्द्र को तत्काल प्रभावी राहत, तेज़ सर्वे और दीर्घकालिक संरक्षणात्मक नीतियाँ लागू करनी चाहिए ताकि किसान फिर से खड़ा हो सके।

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