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“श्रील प्रभुपाद जी के 48वें तिरोभाव दिवस पर इंदौर में भव्य श्रद्धांजलि उत्सव | इस्कॉन श्री श्री राधा गोविंद मंदिर, निपानिया”

इंदौर के निपानिया स्थित इस्कॉन श्री श्री राधा गोविंद मंदिर में आज अत्यंत भक्तिभाव और श्रद्धा के साथ जगद्गुरु ए.सी. भक्तिवेदांत स्वामी श्रील प्रभुपाद जी का 48वां तिरोभाव महोत्सव मनाया गया।
इस पावन अवसर पर कार्यक्रम का नेतृत्व परम पूज्य महामन स्वामी महाराज जी, जो श्रील प्रभुपाद जी के वरिष्ठ शिष्य (Senior Disciple) हैं, के करकमलों द्वारा किया गया।

कार्यक्रम की शुरुआत प्रभुपाद जी की गौरवमयी स्मृतियों के साथ हुई, जिसमें महामन स्वामी महाराज जी सहित अन्य वरिष्ठ भक्तों ने श्रील प्रभुपाद जी के अद्भुत जीवन एवं कार्यों की ग्लोरिफिकेशन (महिमा वर्णन) की।
भक्तों ने बताया कि किस प्रकार 70 वर्ष की आयु में प्रभुपाद जी ने अकेले पश्चिमी देशों की यात्रा की और वहाँ जाकर हरे कृष्ण आंदोलन का प्रचार किया, जिससे हजारों लोगों ने कृष्ण भक्ति को अपनाया।

प्रभुपाद जी द्वारा 70 से अधिक ग्रंथों की रचना, 108 मंदिरों की स्थापना, और मात्र 10 वर्षों में संपूर्ण विश्व में वैदिक संस्कृति का प्रचार — सभी भक्तों के लिए प्रेरणास्रोत है।

🙏 श्रील प्रभुपाद जी के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त करते हुए महामन स्वामी महाराज जी ने कहा —

> “यदि प्रभुपाद जी ने 70 वर्ष की आयु में वह एक कदम न उठाया होता, तो आज हम सब कृष्ण चेतना के इस अद्भुत वरदान से वंचित रह जाते।”

🪔 इसके पश्चात प्रभुपाद जी का अभिषेक समारोह अत्यंत श्रद्धापूर्वक आयोजित हुआ।
इस अभिषेक में दूध, दही, घी, शहद, गोमूत्र, सात प्रकार के फलों का रस तथा औषधीय द्रव्यों का प्रयोग किया गया।
इसके बाद भक्तों ने प्रेमपूर्वक पुष्पांजलि अर्पण की तथा प्रभुपाद जी को विविध प्रकार के केक, मूँग का हलवा, कचौरी और 56 भोग समर्पित किए।

🎶 सम्पूर्ण वातावरण हरे कृष्ण महामंत्र, “प्रभुपाद प्राण धन मोर” तथा अन्य वैष्णव गीतों से गूंज उठा।

शाम 7:20 बजे प्रभुपाद जी की 108 दीपों से महाआरती संपन्न की गई, जिसके दर्शन से पूरा मंदिर परिसर आध्यात्मिक आनंद से आलोकित हो उठा।
कार्यक्रम के अंत में सभी भक्तों को महाप्रसाद वितरित किया गया।

इस कार्यक्रम में प्रमुख रूप से उपस्थित रहे —
श्रीमान डॉक्टर लक्ष्मण दास, श्रीमान गिरिधर गोपाल दास , श्रीमान भक्तवत्सल दास, अच्युत गोपाल दास, समर्पित गौर दास, रणवीर कृष्ण दास, दामोदर कृष्ण दास, ,प्रियव्रत,केशवभक्त दास , माधव चरण दास, करुणा कृष्ण दास एवं अन्य सेवाभावी भक्तों द्वारा किया गया।

अंत में संकीर्तन और कीर्तन के साथ पूरा वातावरण भक्ति रस में सराबोर हो गया।

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